झारखंड: कुड़मी समाज का ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन, आदिवासी दर्जा की मांग

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रांची, 21 सितंबर 2025: झारखंड में कुड़मी समाज ने अनुसूचित जनजाति (ST) दर्जा और कुरमाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर 20 सितंबर से अनिश्चितकालीन ‘रेल टेका डहर छेका’ आंदोलन शुरू किया। झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में रेलवे ट्रैक जाम होने से रेल सेवाएं ठप हैं। हजारों प्रदर्शनकारी पारंपरिक परिधान में ढोल-मांदर के साथ पारसनाथ, चंद्रपुरा, टाटीसिलवे, मूरी, गोमो, सिनी, चक्रधरपुर, चाकुलिया और जामताड़ा जैसे 40 स्टेशनों पर ट्रैक पर उतरे। दक्षिण पूर्व रेलवे ने 12 ट्रेनें रद्द कीं, 9 के मार्ग बदले, और 21 को नियंत्रित किया।

कुड़मी समाज का दावा है कि 1931 की जनगणना में उन्हें ST में शामिल किया गया था, लेकिन 1950 में हटा दिया गया। उनकी संस्कृति आदिवासी समुदायों से मिलती है। पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने PMO को पत्र लिखा, जिस पर राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी गई। कुड़मी विकास मोर्चा के ओमप्रकाश महतो ने कहा, “यह ऐतिहासिक मांग है।”

आदिवासी संगठन, जैसे केंद्रीय सरना समिति, ने विरोध जताया, दावा किया कि कुड़मी OBC हैं और ST आरक्षण में घुसपैठ चाहते हैं। JLKM और आजसू ने समर्थन दिया, पर आदिवासी-कुड़मी तनाव बढ़ा। रेलवे ने RPF-GRP को हाई अलर्ट पर रखा, रांची में धारा 144 लागू है। आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन अनिश्चितकालीन है, केंद्र की प्रतिक्रिया का इंतजार है।