रांची में बैंककर्मियों का प्रदर्शन, 5 दिवसीय बैंकिंग सप्ताह की मांग तेज

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11 सितंबर को देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी, PLI भुगतान में भेदभाव खत्म करने समेत कई मांगें

रांची, 29 अगस्त: पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने, प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के भुगतान में कथित विसंगतियां दूर करने और लंबित मांगों के समाधान को लेकर बैंककर्मियों का आंदोलन तेज हो गया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के आह्वान पर गुरुवार को रांची में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रदर्शन कर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। प्रदर्शन में महिला बैंककर्मियों और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के कर्मियों ने भी हिस्सा लिया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बदलते बैंकिंग परिवेश में सप्ताह में पांच दिन काम और दो दिन अवकाश की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। बैंक यूनियनों का कहना है कि रिजर्व बैंक, नाबार्ड, सेबी, एलआईसी और कई अन्य संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू है, ऐसे में वाणिज्यिक बैंकों में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।

इसके अलावा बैंककर्मियों ने प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन के भुगतान में कथित भेदभाव को समाप्त करने, पेंशन अपडेशन सहित लंबित मुद्दों का समाधान करने और कर्मचारी विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग की। यूनियनों के अनुसार, 8 मार्च 2024 को हुए 12वें द्विपक्षीय समझौते के बाद भी कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं।

बैंक यूनियनों ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। इसके तहत 11 सितंबर 2026 को एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल, इसके बाद 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया गया है। मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।

झारखंड में इस आंदोलन का असर बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने की आशंका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में करीब तीन हजार बैंक शाखाएं हैं, जहां हड़ताल की स्थिति में सामान्य बैंकिंग कामकाज प्रभावित हो सकता है।

बैंक यूनियनों ने केंद्र सरकार और बैंक प्रबंधन से बातचीत के माध्यम से मांगों का शीघ्र समाधान करने की अपील की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और व्यापक किया जाएगा।