रांची, 20 जून: झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रवेश प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं सख्त बनाया जा रहा है। राज्य के सरकारी एवं निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस तथा अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में नामांकन लेने वाले अभ्यर्थियों का प्रवेश अब दस्तावेजों के विस्तृत सत्यापन के बाद ही अंतिम रूप से कन्फर्म किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग और काउंसिलिंग एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि अभ्यर्थियों को मूल प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके बाद ही प्रवेश की स्वीकृति दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, नीट-यूजी के आधार पर होने वाली काउंसिलिंग के दौरान अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, जन्मतिथि, पहचान पत्र समेत अन्य आवश्यक दस्तावेजों की गहन जांच की जाएगी। किसी भी प्रकार की त्रुटि, फर्जीवाड़ा या अपूर्ण दस्तावेज पाए जाने पर अभ्यर्थी का प्रवेश रद्द किया जा सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम पूर्व में सामने आए फर्जी प्रमाणपत्रों के मामलों को देखते हुए उठाया है। रांची स्थित RIMS सहित राज्य के अन्य मेडिकल संस्थानों में फर्जी जाति प्रमाणपत्र और दस्तावेजों के आधार पर दाखिला लेने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके बाद संबंधित छात्रों के नामांकन रद्द किए गए थे।
अधिकारियों का कहना है कि नई व्यवस्था से योग्य अभ्यर्थियों को ही प्रवेश मिल सकेगा तथा मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहेगी। राज्य में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ सीटों की संख्या बढ़ाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, इसलिए प्रवेश प्रक्रिया को पूरी तरह त्रुटिरहित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को सलाह दी गई है कि वे काउंसिलिंग और रिपोर्टिंग के समय सभी मूल दस्तावेज तथा उनकी प्रमाणित प्रतियां साथ लेकर आएं, ताकि सत्यापन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।