बेंगलुरु, 19 जून: कर्नाटक विधान परिषद (एमएलसी) की सात सीटों के लिए हुए चुनाव में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि भाजपा को दो सीटों से संतोष करना पड़ा। चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग ने भाजपा की रणनीति को बड़ा झटका दिया और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी।
चुनाव में कुल सात सीटों के लिए आठ उम्मीदवार मैदान में थे। विधानसभा में संख्या बल के आधार पर कांग्रेस चार सीटें आसानी से जीत सकती थी, लेकिन उसने पांचवीं सीट पर भी कब्जा जमाकर अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन किया। कांग्रेस की इस सफलता के पीछे विपक्षी दलों के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव के दौरान भाजपा से निष्कासित विधायक एस.टी. सोमशेखर और शिवराम हेब्बार ने कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। दोनों नेताओं की मतदान के बाद मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ तस्वीरें भी सामने आईं, जिससे भाजपा की मुश्किलें और बढ़ गईं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के नेतृत्व की बड़ी परीक्षा थी, जिसमें वे सफल रहे। कांग्रेस ने न केवल अपने सभी उम्मीदवारों को जिताया, बल्कि विपक्षी खेमे में भी सेंध लगाने में कामयाबी हासिल की।
उल्लेखनीय है कि यह चुनाव 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे सात विधान परिषद सदस्यों के स्थान पर कराया गया था। मतदान और मतगणना 18 जून को ही संपन्न हुई।
कांग्रेस की इस जीत को राज्य की राजनीति में उसके बढ़ते प्रभाव और संगठनात्मक मजबूती के रूप में देखा जा रहा है, जबकि भाजपा के लिए क्रॉस वोटिंग चिंता का विषय बन गई है। आने वाले समय में इसका असर राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और दलों के आंतरिक समीकरणों पर पड़ सकता है।