नई दिल्ली, 15 जून। भारतीय सेना ने औपनिवेशिक दौर की परंपराओं को समाप्त करने और सैन्य संस्कृति को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ढालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सेना ने अपनी नई ड्रेस रेगुलेशन पुस्तिका “आर्मी यूनिफॉर्म्स-2026” जारी की है, जिसमें वर्दी, औपचारिक पोशाक और समारोहों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
नई व्यवस्था के तहत अधिकारियों को औपचारिक अवसरों पर बंद-गले वाली भारतीय शैली की ‘बंदी’ जैकेट पहनने की अनुमति दी गई है। यह जैकेट फुल स्लीव शर्ट, औपचारिक पैंट और बंद जूतों के साथ पहनी जा सकेगी। सेना का मानना है कि इससे सैन्य परंपराओं में भारतीयता की झलक और अधिक मजबूत होगी।
इसके अलावा, सेना ने मेस ड्रेस नंबर-5 और नंबर-6 से पारंपरिक पाउच बेल्ट को हटा दिया है। हालांकि कुछ विशेष रेजिमेंटल और कोर समारोहों में इसका उपयोग जारी रह सकेगा। वहीं, परेड के दौरान रिव्यूइंग ऑफिसर (निरीक्षण अधिकारी) के लिए तलवार साथ रखना अब अनिवार्य नहीं होगा, बल्कि इसे वैकल्पिक बना दिया गया है।
सेना ने ड्रेस नियमावली से औपनिवेशिक विरासत से जुड़े कई शब्दों और प्रतीकों को भी हटाया है। इनमें “रॉयल” जैसे पुराने शब्द शामिल हैं, जिन्हें अब आधिकारिक उपयोग से बाहर किया जा रहा है। सेना के अनुसार यह कदम देश की संप्रभु पहचान और समकालीन भारतीय सोच के अनुरूप सैन्य परंपराओं को विकसित करने की दिशा में उठाया गया है।
नई नियमावली में एक नई शीतकालीन वर्दी भी शामिल की गई है तथा वर्दी पहनने, साज-सज्जा और अनुशासन संबंधी कई प्रावधानों को अद्यतन किया गया है। सेना का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन बनाए रखते हुए भारतीय सैन्य पहचान को और मजबूत करना है।