सीएनटी एक्ट में व्यावहारिक सुधारों की पहल, धर्मेश उरांव मेमोरियल फाउंडेशन करेगा अध्ययन

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रांची, 14 जून: छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) में संशोधन की आवश्यकता तथा इसके क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न हो रही व्यावहारिक समस्याओं को लेकर धर्मेश उरांव मेमोरियल फाउंडेशन ने व्यापक विमर्श शुरू करने का निर्णय लिया है। फाउंडेशन का कहना है कि आदिवासी भूमि संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए इस कानून की मूल भावना को अक्षुण्ण रखते हुए वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप कुछ प्रावधानों की समीक्षा आवश्यक है।

फाउंडेशन के अध्यक्ष निशा उरांव ने कहा कि सीएनटी एक्ट झारखंड के आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और भूमि अधिकारों की रक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। हालांकि समय के साथ कई ऐसे व्यावहारिक मुद्दे सामने आए हैं, जिनके कारण आम लोगों को भूमि हस्तांतरण, उत्तराधिकार, आवास निर्माण, बैंक ऋण, औद्योगिक निवेश तथा विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि फाउंडेशन विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, विधि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रभावित लोगों के साथ संवाद स्थापित कर सुझाव एकत्र करेगा। इन सुझावों के आधार पर एक विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर राज्य सरकार को सौंपा जाएगा, ताकि कानून की मूल भावना से समझौता किए बिना जनहित में आवश्यक सुधारों पर विचार किया जा सके।

फाउंडेशन का मानना है कि सीएनटी एक्ट के कारण आदिवासी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, लेकिन बदलते सामाजिक एवं आर्थिक परिवेश में कुछ प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और व्यावहारिक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इस विषय पर जल्द ही राज्यस्तरीय संगोष्ठी आयोजित करने की भी योजना है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपनी राय रखेंगे।

निशा उरांव ने कहा कि किसी भी संशोधन का उद्देश्य भूमि संरक्षण को कमजोर करना नहीं, बल्कि कानून के प्रभावी और जनहितकारी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर सभी पक्षों की राय लेकर संतुलित निर्णय लिया जाए।

फाउंडेशन ने समाज के विभिन्न वर्गों से भी अपील की है कि वे सीएनटी एक्ट से संबंधित समस्याओं और सुझावों को साझा करें, ताकि एक व्यापक एवं व्यवहारिक नीति सुझाव सरकार के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।हेडलाइन: सीएनटी एक्ट में संशोधन और व्यावहारिक समस्याओं पर गंभीर मंथन, सरकार को सुझाव देगा धर्मेश उरांव मेमोरियल फाउंडेशन।