कोलकाता, 02 जून: कभी घरों में घरेलू सहायिका के रूप में काम कर परिवार का गुजारा करने वाली 37 वर्षीय कलिता माझी आज पश्चिम बंगाल सरकार में राज्यमंत्री बन गई हैं। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा संघर्ष, मेहनत और जनसेवा के प्रति समर्पण की मिसाल बनकर उभरी है। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद उन्हें राज्य मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के आउसग्राम विधानसभा क्षेत्र से विधायक बनीं कलिता माझी कभी महज 2,500 से 4,500 रुपये प्रतिमाह की आय पर घरेलू कामकाज कर अपने परिवार का पालन-पोषण करती थीं। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी थी। उनके पति प्लंबर का काम करते हैं और परिवार सीमित संसाधनों में जीवन यापन करता रहा है।
कलिता माझी ने वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी के बूथ स्तर के कार्यकर्ता के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की थी। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्हें पार्टी ने उम्मीदवार बनाया, लेकिन उस समय उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने जमीनी स्तर पर संगठन और जनता के बीच लगातार काम जारी रखा। वर्ष 2026 के चुनाव में पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचने का सपना पूरा किया।
उनकी संघर्षपूर्ण कहानी ने राष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित किया था। वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सराहना करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणा बताया था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों का राजनीति में आगे बढ़ना लोकतंत्र की ताकत को दर्शाता है।
राज्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद कलिता माझी ने कहा कि अब उनके कंधों पर पूरे पश्चिम बंगाल की जिम्मेदारी है और वह आम लोगों, महिलाओं तथा पिछड़े वर्गों के हित में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनकी सफलता को जमीनी कार्यकर्ताओं और आम लोगों के लिए प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीति में संघर्ष से सफलता तक पहुंची कलिता माझी की कहानी यह साबित करती है कि दृढ़ संकल्प और जनसेवा की भावना के बल पर कोई भी व्यक्ति समाज के सर्वोच्च मंच तक पहुंच सकता है।