झारखंड में खत्म होगा बालू संकट, रांची समेत 6 बड़े घाटों से शुरू होगा खनन

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रांची, 17 मई: झारखंड में लंबे समय से जारी बालू संकट से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने रांची समेत छह बड़े बालू घाटों से खनन शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। खान विभाग द्वारा नीतिगत बदलाव और जिला प्रशासन को अधिकार दिए जाने के बाद अब बालू उठाव का रास्ता साफ हो गया है।

जानकारी के अनुसार, पहले चरण में रांची, बोकारो और जमशेदपुर के छह प्रमुख घाटों को खनन की अनुमति दी गई है। इसके अलावा 29 अन्य घाटों से भी जल्द बालू उठाव शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का मानना है कि इससे बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर भी नियंत्रण लगेगा।

मुख्यमंत्री Hemant Soren की मंजूरी के बाद अब जिला उपायुक्तों को बालू घाटों की लीज स्वीकृति देने का अधिकार मिल गया है। इससे लंबित लीज डीड और कागजी प्रक्रिया में तेजी आएगी। अब तक पर्यावरण स्वीकृति, ग्रामसभा अनुमति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी के कारण कई घाट बंद पड़े थे।

बालू की कमी के कारण राज्य में निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे थे। कई जिलों में एक ट्रैक्टर बालू की कीमत 6 से 7 हजार रुपये तक पहुंच गई थी, जबकि हाइवा बालू 25 से 35 हजार रुपये में बिक रहा था। अवैध खनन और कालाबाजारी भी तेजी से बढ़ रही थी, जिससे सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा था।

खान विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सभी लंबित प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि मॉनसून से पहले अधिक से अधिक घाटों से वैध खनन शुरू कराया जा सके। उल्लेखनीय है कि हर वर्ष 10 जून से 15 अक्टूबर तक एनजीटी के निर्देशानुसार बालू उठाव पर रोक रहती है।