रांची/नई दिल्ली, 12 मई: झारखंड के पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री और कांग्रेस नेता आलमगीर आलम को टेंडर कमीशन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब दो साल से जेल में बंद आलमगीर आलम को सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दे दी।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने आलमगीर आलम और उनके निजी सचिव संजीव लाल की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया। दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
गौरतलब है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मई 2024 में कथित टेंडर कमीशन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आलमगीर आलम को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके करीबी लोगों के ठिकानों से करीब 32.20 करोड़ रुपये नकद बरामद किए गए थे, जिसके बाद यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आया था।
ईडी का आरोप है कि ग्रामीण विकास विभाग में टेंडर पास कराने के एवज में कमीशन लिया जाता था और अवैध कमाई को विभिन्न संपत्तियों में निवेश किया गया। इसी मामले में ईडी ने हाल ही में आलमगीर आलम और इंजीनियर वीरेंद्र राम से जुड़ी करीब 86.61 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की थी।
इससे पहले अप्रैल 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने आलमगीर आलम की जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले की डे-टू-डे सुनवाई का निर्देश दिया था। बाद में ट्रायल की प्रगति और लंबे समय तक हिरासत में रहने के आधार पर कोर्ट ने उन्हें राहत प्रदान की।
आलमगीर आलम को जमानत मिलने के बाद झारखंड की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि विपक्ष ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।