पलामू में NEET परीक्षा में भारी लापरवाही, हिंदी माध्यम के छात्रों को दिए गए अंग्रेजी प्रश्न पत्र, देर शाम 7 बजे दोबारा शुरू हुई परीक्षा

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मेदिनीनगर (पलामू), 4 मई 2026: झारखंड के पलामू जिले में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET UG 2026) के दौरान एक परीक्षा केंद्र पर गंभीर लापरवाही सामने आई। हिंदी माध्यम चुनने वाले छात्रों को अंग्रेजी भाषा का प्रश्न पत्र थमा दिया गया, जिससे छात्रों में आक्रोश फैल गया और परीक्षा में देरी हुई।

रविवार को मेदिनीनगर स्थित योध सिंह नामधारी महिला महाविद्यालय परीक्षा केंद्र पर यह अनियमितता हुई। निर्धारित समय दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक परीक्षा होनी थी, लेकिन प्रश्न पत्र वितरण में गड़बड़ी के कारण छात्रों ने हंगामा कर दिया। छात्रों ने तुरंत शिकायत की और अधिकारियों से मांग की कि उनकी समस्या का समाधान किया जाए।

मामला बढ़ता देख जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। डीसी दिलीप प्रताप सिंह शेखावत, एसपी कपिल चौधरी और सदर एसडीएम सुलोचना मीणा समेत वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। छात्रों के साथ बातचीत के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की गाइडलाइंस के अनुसार हिंदी माध्यम के सही प्रश्न पत्र उपलब्ध कराए गए और परीक्षा दोबारा शुरू की गई।

अधिकारियों ने बताया कि गड़बड़ी के बाद शाम करीब 6-7 बजे परीक्षा फिर से शुरू हुई। छात्र अब शांतिपूर्ण माहौल में परीक्षा दे रहे हैं। पलामू में कुल चार केंद्रों पर NEET परीक्षा आयोजित की जा रही थी, जिनमें अन्य केंद्रों पर परीक्षा सामान्य रूप से संपन्न हुई।

सदर एसडीएम सुलोचना मीणा ने कहा, “छात्रों को गलत प्रश्न पत्र मिलने की शिकायत मिली थी। NTA के नियमों के अनुसार तुरंत सुधार किया गया और परीक्षा दोबारा शुरू कर दी गई। किसी भी छात्र के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।”

जिला प्रशासन ने पूरे परीक्षा केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी हुई है। CCTV, जैमर और बायोमेट्रिक व्यवस्था के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, लेकिन प्रश्न पत्र वितरण में हुई इस लापरवाही ने परीक्षार्थियों और अभिभावकों में नाराजगी पैदा कर दी है।

प्रभावित छात्रों ने कहा कि इतनी बड़ी परीक्षा में इस तरह की गलती उनके मानसिक स्वास्थ्य और तैयारी पर असर डालती है। कई छात्रों ने परीक्षा शुरू होने में हुई देरी पर भी असंतोष जताया।

यह घटना NEET परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करती है। NTA और जिला प्रशासन से अब इस लापरवाही की जांच की मांग की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी गलतियां न दोहराई जाएं।