रामगढ़, 08 अप्रैल 2026: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग द्वारा “अमेरिका–ईरान संघर्ष: भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए खतरा या अवसर” विषय पर एक प्रभावशाली वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों को तार्किक एवं संतुलित ढंग से प्रस्तुत किया।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि, महंगाई, व्यापार घाटा, विदेशी निवेश, विनिमय दर तथा आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से अपने विचार रखे। एक पक्ष ने इस संघर्ष को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बताया, जबकि दूसरे पक्ष ने इसे भारत के लिए रणनीतिक अवसर के रूप में प्रस्तुत करते हुए नए व्यापारिक और कूटनीतिक संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम का संचालन अर्थशास्त्र विभागाध्यक्ष नीरज करमाली के मार्गदर्शन में किया गया। निर्णायक मंडल में डॉ. प्रेम प्रकाश, डॉ. मनमीत कौर, डॉ. सूरज मिंज और डॉ. गोविंद कुमार रोहित शामिल रहे, जिन्होंने प्रतिभागियों का मूल्यांकन उनके तर्क, प्रस्तुति कौशल और विषय की समझ के आधार पर किया। अंत में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया।
इस अवसर पर कुलाधिपति बी. एन. साह ने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में ऐसे विषयों पर विमर्श अत्यंत आवश्यक है, जिससे विद्यार्थियों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक प्रभावों की समझ विकसित होती है। सचिव प्रियंका कुमारी ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं और उन्हें समसामयिक मुद्दों से जोड़ते हैं।
कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने छात्रों के प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए इसे विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रतीक बताया। कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों में आत्मविश्वास और अभिव्यक्ति कौशल का विकास करते हैं। विभागाध्यक्ष ने बताया कि इस प्रतियोगिता का उद्देश्य छात्रों को वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के प्रति जागरूक करना और उन्हें व्यावहारिक विश्लेषण के लिए प्रेरित करना है।
कार्यक्रम में वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार सहित विभाग के शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।