रांची में एलपीजी संकट गहराया: छोटे सिलेंडर गायब, छात्र और बैचलर्स घर लौटने को मजबूर

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रांची, 29 मार्च 2026: राजधानी रांची में रसोई गैस की गंभीर किल्लत ने आमजन की रसोई को ठंडा कर दिया है। खासकर 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर बाजार से लगभग गायब हो चुके हैं, जिसकी वजह से छात्र-छात्राएं और कामकाजी बैचलर्स सबसे ज्यादा परेशान हैं। कई छात्र अब पढ़ाई छोड़कर घर लौटने पर मजबूर हो रहे हैं, जबकि बचे हुए लोग बाहर के महंगे खाने पर निर्भर हो गए हैं।

रांची के विभिन्न इलाकों में छोटे एलपीजी सिलेंडर की भारी कमी देखी जा रही है। सामान्य दिनों में जहां 5 किलो सिलेंडर आसानी से 340 रुपये में उपलब्ध होता था, वहीं अब कालाबाजारी में 300 रुपये प्रति किलो तक कीमत वसूली जा रही है। हॉस्टल, पीजी और किराए के कमरों में रहने वाले छात्रों के लिए खाना बनाना मुश्किल हो गया है। कई छात्रों ने बताया कि भोजन का संकट बढ़ने से उनका मासिक खर्चा 1500 से 2000 रुपये तक बढ़ गया है।

एक नर्सिंग छात्रा ने बताया, “पढ़ाई के साथ खाने का इंतजाम अब सबसे बड़ी समस्या बन गई है। छोटा सिलेंडर तो मिल ही नहीं रहा। बाहर होटल-ढाबे में खाने से खर्चा आसमान छू रहा है। कई साथी घर चले गए हैं।”

कामकाजी बैचलर्स का भी यही हाल है। ऑफिस जाने वाले युवा पहले खुद खाना बनाकर खर्च बचाते थे, लेकिन अब उन्हें महंगे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं या इंडक्शन/कोयला पर शिफ्ट होना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण एलपीजी आयात प्रभावित हुआ है। केंद्र सरकार ने घरेलू उपयोग की प्राथमिकता बनाए रखते हुए कमर्शियल सप्लाई घटा दी है। रांची में बुकिंग अंतर बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है, जिससे पैनिक बुकिंग और अफवाहों ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

रांची उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने हाई-लेवल बैठक कर कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्राथमिकता वाले संस्थानों जैसे छात्रावासों और अस्पतालों को गैस उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन ने एजेंसियों को घर-घर डिलीवरी सुनिश्चित करने को कहा है।

रांची के कोचिंग हॉस्टलों और नर्सिंग छात्रावासों में इस संकट का सबसे ज्यादा असर दिख रहा है। कई छात्र अब लकड़ी या इंडक्शन पर खाना बनाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इससे बिजली बिल भी बढ़ रहा है।

सरकार का दावा है कि देश स्तर पर एलपीजी की कुल उपलब्धता में कमी नहीं है, लेकिन स्थानीय वितरण और पैनिक की वजह से कतारें लग रही हैं।

रांची प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है। उम्मीद है कि केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से यह संकट जल्द समाप्त होगा, ताकि छात्रों की पढ़ाई और आम जीवन प्रभावित न हो।