खाड़ी युद्ध का असर: पेट्रोल-डीजल की पैनिक बाइंग, कई राज्यों में पंपों पर लंबी कतारें, कुछ जगहों पर ‘नो स्टॉक’ बोर्ड

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नई दिल्ली/पटना, 27 मार्च 2026: ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बाद पश्चिम एशिया (खाड़ी) में बढ़े तनाव और होर्मुज स्ट्रेट पर संभावित बाधा के कारण देश के कई राज्यों में पेट्रोल और डीजल की पैनिक बाइंग शुरू हो गई है। पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ स्थानों पर अस्थायी रूप से ‘नो स्टॉक’ के बोर्ड लगने की खबरें आ रही हैं।

गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, नागपुर और अन्य इलाकों में पंपों पर भीड़ उमड़ पड़ी है। सोशल मीडिया पर अफवाहें तेजी से फैल रही हैं कि ईंधन की कमी हो सकती है या कीमतें आसमान छू लेंगी, जिससे आम लोगों में घबराहट बढ़ गई है। कुछ जगहों पर बिक्री सामान्य से तीन गुना तक बढ़ गई, जिसके चलते कुछ पंपों पर स्टॉक अस्थायी रूप से खत्म दिख रहा है।

हालांकि, सरकार और तेल कंपनियों ने साफ-साफ आश्वासन दिया है कि देश में पेट्रोल, डीजल या LPG की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम मंत्रालय, इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने कहा कि रिफाइनरियां पूरी क्षमता से चल रही हैं। देश के पास कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। वैकल्पिक व्यवस्थाएं जैसे रूस से आयात बढ़ाना भी जारी है।

तेल कंपनियों ने अपील की है कि लोग अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बाइंग से बचें। अनावश्यक खरीदारी से असली दबाव बढ़ता है और सामान्य उपभोक्ताओं को परेशानी होती है। पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और कहीं भी राशनिंग लागू नहीं की गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 1990-91 के पहले खाड़ी युद्ध की तरह यह स्थिति भी अफवाहों से ज्यादा प्रभावित लग रही है। उस समय भी पैनिक बाइंग के कारण कालाबाजारी और लंबी लाइनें देखी गई थीं, लेकिन आज भारत की Strategic Petroleum Reserves और विविध आयात स्रोतों के कारण स्थिति ज्यादा मजबूत है।

फिलहाल कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ी हुई हैं, लेकिन सरकार घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नजर रखे हुए है। अगर युद्ध लंबा खिंचा तो कीमतों पर कुछ असर पड़ सकता है, लेकिन अभी तक कमी की कोई आशंका नहीं है।

सरकार की अपील

• केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन भरवाएं।

• सोशल मीडिया पर फैल रही गलत खबरों पर भरोसा न करें।

• आधिकारिक सूत्रों (पेट्रोलियम मंत्रालय या तेल कंपनियों) के बयानों पर ही विश्वास करें।

पटना समेत बिहार में भी अगर पंपों पर भीड़ दिख रही हो तो लोकल ऑयल कंपनियों के अपडेट चेक करें। शांत रहें, अफवाह न फैलाएं पैनिक खुद समस्या बन जाता है।