रांची/पटना, 23 मार्च 2026: झारखंड और बिहार में आज चैती छठ महापर्व का दूसरा दिन खरना बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। दोनों राज्यों में व्रती महिलाओं ने सुबह से ही निर्जला उपवास रखा है और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ की खीर, घी वाली रोटी, केला आदि सात्विक प्रसाद ग्रहण कर 36 घंटे का कठिन निर्जला व्रत शुरू करेंगी। यह व्रत कल संध्या अर्घ्य और परसों उषा अर्घ्य तक चलेगा।
दोनों राज्यों में छठ पूजा की परंपराएं लगभग समान हैं, जहाँ छठी मैया और सूर्य देव की आराधना संतान सुख, स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए की जाती है। बिहार में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे शहरों के साथ-साथ झारखंड में रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और देवघर जैसे इलाकों में व्रतियों की भारी भीड़ देखी जा रही है।
पटना के गंगा घाट, पुनपुन नदी, सोन नदी और झारखंड के सुबर्णरेखा, दामोदर, खरकई नदियों के घाटों पर छठ व्रतियों की तैयारी जोरों पर है। दोनों राज्यों के प्रशासन ने खतरनाक घाटों की सूची जारी की है और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। व्रती महिलाएं घरों में मिट्टी के चूल्हे पर आम की लकड़ी से प्रसाद तैयार कर रही हैं। शाम को सूर्यास्त के समय (लगभग 6:00-6:30 बजे के बीच) खरना प्रसाद का भोग लगाकर छठी मैया और सूर्य देव से आशीर्वाद मांगा जाएगा।
खरना छठ पूजा की तैयारी का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस दिन पूरे दिन बिना जल-भोजन के रहकर व्रती शरीर और मन की शुद्धि करती हैं। शाम को प्रसाद ग्रहण के बाद 36 घंटे तक पानी की एक बूंद भी नहीं ली जाती। बिहार और झारखंड दोनों में इस कठोर तप से छठी मैया प्रसन्न होकर व्रतियों को आशीर्वाद देती हैं। झारखंड में कुछ क्षेत्रों में इसे ‘लोहंडा’ भी कहा जाता है, लेकिन विधि लगभग एक समान है।
चैती छठ 2026 की मुख्य तिथियां
• नहाय-खाय: 22 मार्च (रविवार)- पूरा हो चुका
• खरना: 23 मार्च (सोमवार)- आज
• संध्या अर्घ्य (अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य): 24 मार्च (मंगलवार)
• उषा अर्घ्य एवं पारण (उगते सूर्य को अर्घ्य): 25 मार्च (बुधवार)
आज शाम खरना पूजा के बाद व्रती परिवार सहित घाटों की ओर प्रस्थान करेंगी। बिहार-झारखंड के कोने-कोने में छठ का माहौल है।