रामगढ़ की खेली जाएगी होली अब प्राकृतिक रंगों से, एसएचजी दीदियों ने बनाया 145 किग्रा हर्बल गुलाल

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रामगढ़, 21 फरवरी: होली का त्योहार उमंग और रंगों से भरा होता है, लेकिन केमिकल युक्त गुलाल और रंगों से त्वचा जलने, एलर्जी और आंखों को नुकसान का खतरा रहता है। इस बार रामगढ़ जिले में होली का रंग कुछ खास और सुरक्षित होने वाला है। झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के ‘पलाश’ पहल के तहत जिले की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने पूरी तरह प्राकृतिक और हर्बल गुलाल तैयार किया है।

जिले के सभी छह प्रखंडों में सक्रिय सखी मंडलों की दीदियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कुल 49 दीदियों ने मिलकर 145 किलोग्राम इको-फ्रेंडली हर्बल गुलाल का उत्पादन किया है।

चितरपुर प्रखंड से 12 दीदियों द्वारा 15 किग्रा, गोला प्रखंड से 12 दीदियों द्वारा 30 किग्रा, मांडू प्रखंड से 10 दीदियों द्वारा 45 किग्रा, पतरातू प्रखंड से 5 दीदियों द्वारा 25 किग्रा, दुलमी प्रखंड से 5 दीदियों द्वारा 15 किग्रा और रामगढ़ प्रखंड से 5 दीदियों द्वारा 15 किग्रा गुलाल मिलकर तैयार किया गया।

यह हर्बल गुलाल शुद्ध अरारोट और सुरक्षित फूड कलर के साथ तैयार किया गया है, जो त्वचा पर मुलायम और ठंडक प्रदान करता है। विभिन्न रंगों के लिए प्राकृतिक सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है हरा रंग सूखे और पिसे ताजे पालक से, गुलाबी व लाल रंग चुकंदर और लाल फूलों से, पीला व नारंगी रंग गेंदे तथा पलाश के फूलों से, जबकि त्वचा की सुरक्षा के लिए नीम की पत्तियों का विशेष उपयोग किया गया है।

झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी के मार्गदर्शन में तैयार यह ‘हर्बल पलाश गुलाल’ न केवल केमिकल-मुक्त है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बन रहा है। दीदियों ने इसे मुख्य बाजारों में विशेष स्टॉल लगाकर बेचने की योजना बनाई है। साथ ही, रामगढ़ जिले के सभी ‘पलाश मार्ट’ में यह उपलब्ध कराया जा रहा है।

इस पहल से जहां लोग सुरक्षित होली मना सकेंगे, वहीं प्रकृति के साथ जुड़ाव और महिलाओं की मेहनत का रंग भी इस त्योहार में उड़ेगा। रामगढ़ की यह होली अब केमिकल के बजाय प्रकृति के प्यार, स्वास्थ्य सुरक्षा और स्वावलंबन से रंगी जा रही है।