झामुमो ने केंद्रीय बजट को ‘खोखला और ठगने वाला’ बताया, झारखंड की उपेक्षा का आरोप

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रांची, 1 फरवरी 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आज संसद में पेश किए गए यूनियन बजट 2026-27 पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने तीखी नाराजगी जताई है। पार्टी ने इसे “खोखला, ठगने वाला और जन-विरोधी” बजट करार देते हुए केंद्र सरकार पर झारखंड तथा आदिवासी-किसान-युवा समुदाय की पूरी तरह उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाया है।

झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता कुणाल सारंगी ने बजट को “डर, निराशा और दिशाहीन” बताया। उन्होंने कहा, “यह बजट विकास का नहीं, बल्कि वंचना और निराशा का दस्तावेज है। किसानों, युवाओं और मध्यम वर्ग की घोर उपेक्षा हुई है। रोजगार सृजन, महंगाई नियंत्रण या आदिवासी बहुल राज्यों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं हैं।”

पोटका विधायक संजीव सरदार ने इसे और सख्त शब्दों में खारिज करते हुए कहा, “यह बजट जनता की उम्मीदों के साथ सीधा धोखा है। न किसानों के लिए कुछ ठोस है, न मध्यम वर्ग को राहत, न शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार की कोई गंभीर पहल। पुराने वादों का जिक्र तक नहीं, नई घोषणाएं भी खोखली हैं।”

झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडे ने आरोप लगाया कि बजट में झारखंड को “पूरी तरह नजरअंदाज” किया गया। राज्य के खनिज भंडार के बावजूद रेयर अर्थ कॉरिडोर में कोई जगह नहीं मिली। केंद्र के बकाया पर कोई उल्लेख नहीं है, जबकि पड़ोसी राज्यों को प्राथमिकता दी गई। पार्टी ने इसे “सौतेला व्यवहार” करार दिया।

झामुमो ने बजट को किसान-विरोधी, युवा-विरोधी और आदिवासी हितों से विमुख बताया। पार्टी प्रवक्ताओं ने कहा कि आम लोगों, गरीबों और मजदूरों के लिए कुछ नहीं है, जबकि केंद्र सरकार इसे “विकसित भारत” का रोडमैप बता रही है।

वहीं, भाजपा ने बजट को सकारात्मक बताया है, लेकिन सत्ताधारी गठबंधन में असंतोष साफ दिख रहा है। झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स सहित अन्य संगठनों ने भी राज्य-विशेष प्रावधानों की कमी पर चिंता जताई है।