झारखंड के संघर्ष, स्वाभिमान और राज्य निर्माण को मिला राष्ट्रीय सम्मान: शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण

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नई दिल्ली/रांची, 25 जनवरी 2026: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित पद्म पुरस्कारों में झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री और आदिवासी नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान झारखंड के दशकों पुराने आंदोलन, आदिवासी अस्मिता की रक्षा तथा जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए उनके अथक संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्रदान करता है।

1970 के दशक से शिबू सोरेन ने आदिवासी और मूलवासी समाज को संगठित कर शोषण, विस्थापन और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया। उन्होंने अलग झारखंड राज्य की मांग को गांव-गांव से संसद तक पहुंचाया, जिसके फलस्वरूप 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान झारखंड का गठन हुआ। मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने आदिवासी कल्याण, सामाजिक न्याय, स्थानीय संसाधनों पर अधिकार और पिछड़े क्षेत्रों में विकास को प्राथमिकता दी। उनकी राजनीति सत्ता से अधिक जनसंघर्ष और सरोकारों से जुड़ी रही।

कुल 131 पद्म पुरस्कारों में 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं, जिनमें 19 महिलाएं, 6 विदेशी/NRI/PIO/OCI और 16 मरणोपरांत सम्मान हैं। अन्य प्रमुख नामों में धर्मेंद्र (पद्म विभूषण, मरणोपरांत), अलका याग्निक, ममूटी (पद्म भूषण), रोहित शर्मा (पद्म श्री) आदि हैं।

यह पुरस्कार झारखंड आंदोलन के हजारों कार्यकर्ताओं, शहीदों और बलिदानियों को समर्पित है। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा, “गुरुजी को पद्म भूषण मिलना हर झारखंडवासी के लिए गौरव का क्षण है। उनका जीवन झारखंड की पहचान, आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित रहा। यह सम्मान झारखंड की मिट्टी, संघर्ष की परंपरा और जनआंदोलन की भावना का सम्मान है। गुरुजी को सादर नमन।”

यह ऐतिहासिक क्षण झारखंड के स्वाभिमान को देश भर में गौरवान्वित करता है। पुरस्कार राष्ट्रपति भवन में समारोह में वितरित होंगे।