राधा गोविंद विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के जनक ऑगस्ट कॉम्टे की 228वीं जयंती पर संगोष्ठी आयोजित

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रामगढ़, 19 जनवरी: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय, रामगढ़ के समाजशास्त्र विभाग द्वारा समाजशास्त्र के जनक ऑगस्ट कॉम्टे की 228वीं जयंती के अवसर पर एक विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को समाजशास्त्र की उत्पत्ति, विकास तथा सामाजिक अध्ययन में ऑगस्ट कॉम्टे के योगदान से अवगत कराना था।

कार्यक्रम की शुरुआत ऑगस्ट कॉम्टे के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह ने अपने संबोधन में कहा कि ऑगस्ट कॉम्टे ने समाज के वैज्ञानिक अध्ययन की नींव रखी और समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय के रूप में स्थापित किया। उन्होंने कॉम्टे के प्रत्यक्षवाद तथा तीन अवस्थाओं के सिद्धांत को आधुनिक समाज के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

विश्वविद्यालय की सचिव प्रियंका कुमारी ने समाजिक स्थिरता, सामाजिक परिवर्तन तथा समकालीन सामाजिक समस्याओं के समाधान में समाजशास्त्र की भूमिका पर प्रकाश डाला। वहीं विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने कहा कि समाजशास्त्र सामाजिक जीवन, सामाजिक परिवर्तन और मानव व्यवहार के सामाजिक कारणों एवं परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन है। समाजशास्त्री समूहों, संगठनों और समाजों की संरचना के साथ-साथ आपसी अंतःक्रियाओं का भी अध्ययन करते हैं।

समाजशास्त्र विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. गोविंद कुमार रोहित एवं डॉ. मीरा रानी ने भी अपने संबोधन में ऑगस्ट कॉम्टे के विचारों और समाजशास्त्र के विकास में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार सहित विभाग के अन्य शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।