हिजाब विवाद: झारखंड में डॉ. नुसरत परवीन को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, JMM ने मंत्री इरफान अंसारी के ऑफर से किनारा किया

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रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)

रांची/पटना, 21 दिसंबर 2025: बिहार में हिजाब विवाद के केंद्र में आईं आयुष डॉक्टर नुसरत परवीन को झारखंड में सरकारी नौकरी मिलने की संभावना खत्म हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी द्वारा दिया गया नौकरी का ऑफर उनकी निजी राय है और सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है।

बता दें कि 19 दिसंबर को झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर डॉ. नुसरत को 3 लाख रुपये मासिक वेतन, मनचाही पोस्टिंग, सरकारी फ्लैट, पूर्ण सुरक्षा और सम्मानजनक माहौल के साथ नौकरी का खुला ऑफर दिया था। उन्होंने इसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की महागठबंधन सरकार का “बड़ा और ऐतिहासिक फैसला” बताया और बिहार की घटना को महिलाओं की गरिमा पर हमला करार दिया।

हालांकि, आज झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने सफाई दी कि डॉ. नुसरत को नौकरी देने का कोई सरकारी फैसला नहीं है। इरफान अंसारी का बयान व्यक्तिगत है और पार्टी या सरकार इससे सहमत नहीं है। इससे मंत्री के ऑफर से पल्ला झड़ गया है।

इस मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। भाजपा ने इसे तुष्टिकरण की राजनीति बताया, जबकि महागठबंधन के कुछ नेताओं ने शुरू में समर्थन किया था। डॉ. नुसरत ने अभी तक बिहार में ड्यूटी जॉइन नहीं की है और उनका आगे का फैसला स्पष्ट नहीं है।

विवाद की शुरुआत 15 दिसंबर को पटना में आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र बांटते समय हुई, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने डॉ. नुसरत का हिजाब उतारा था। इस घटना ने देशव्यापी बहस छेड़ दी है।