रामगढ़, 10 नवम्बर 2025: राधा गोविंद विश्वविद्यालय, रामगढ़ के हिंदी विभाग में आज प्रख्यात प्रगतिशील कवि सुदामा पांडेय ‘धूमिल’ की जयंती के अवसर पर “धूमिल का साहित्यिक अवदान” विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं धूमिल जी के चित्र पर माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों ने धूमिल की प्रतिनिधि कविताओं का पाठ किया और उनकी कविताओं में निहित जन-चेतना, राजनीतिक दृष्टि एवं सामाजिक यथार्थ पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विभाग की अध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने की। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी. एन. साह का संदेश भी पढ़ा गया। उन्होंने कहा- “धूमिल की कविता हमें भाषा की सच्चाई और लोकतंत्र की नैतिक जिम्मेदारी की याद दिलाती है। आज जब अभिव्यक्ति का संघर्ष और गहरा होता जा रहा है, धूमिल की कविता और भी प्रासंगिक हो उठती है।”
विश्वविद्यालय सचिव प्रियंका कुमारी ने अपने संदेश में कहा- “धूमिल ने कविता को यथार्थ के धरातल पर खड़ा किया। उनकी रचनाएँ समाज के संघर्ष और आम आदमी की पीड़ा को स्वर देती हैं।”
वहीं कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने शुभकामना संदेश में कहा— “धूमिल की कविताएँ व्यवस्था से सवाल करती हैं और हमें संवेदनशील, सजग तथा सच्चा मनुष्य बनने की प्रेरणा देती हैं।”
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. मनमीत कौर ने कहा- “धूमिल की कविता की सीधी, निर्भीक और सचेत भाषा हमें आत्ममंथन के लिए विवश करती है। उनकी कविताएँ केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि जी जाती हैं।”
कार्यक्रम में कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, विभाग के अन्य प्राध्यापकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन स्नातकोत्तर छात्र किशोर और चन्द्रशेखर ने किया। सुधा, छाया, अंजली, लक्ष्मी आदि छात्राओं ने भी अपने विचार प्रस्तुत कर कार्यक्रम को सार्थक बनाया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने किया।