उत्पाद सिपाही परीक्षा में कथित पेपर लीक, भाजपा ने सीएम हेमंत सोरेन का पुतला फूंका, CBI जांच की मांग

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रांची, 13 अप्रैल 2026: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आज आयोजित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से ठीक पहले रांची के तमाड़ थाना क्षेत्र में कथित पेपर लीक की बड़ी साजिश का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने रांगामाटी स्थित एक निर्माणाधीन भवन/स्कूल में छापेमारी कर 164 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें 159 अभ्यर्थी और 5 मुख्य सरगना शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, गिरोह के सदस्य अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्नपत्र और उत्तर रटवा रहे थे। प्रति अभ्यर्थी 10 से 15 लाख रुपये की ठगी का आरोप है। मौके से फर्जी प्रश्न-उत्तर सेट, प्रिंटर, मोबाइल फोन, फटे एडमिट कार्ड, बैंक चेक और 8 वाहन बरामद किए गए। मुख्य मास्टरमाइंड अतुल वत्स उर्फ अरुण केशरी, जहानाबाद, बिहार को भी गिरफ्तार किया गया, जो पहले कई अन्य परीक्षाओं में नामित रहा है।

JSSC अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि तमाड़ से बरामद फर्जी पेपर मूल परीक्षा के प्रश्नों से बिल्कुल मेल नहीं खाते। दोनों पेपरों की जांच में सिर्फ 4 सवाल मैच हुए, जो संयोग हो सकता है। उन्होंने कहा, “यह पेपर लीक नहीं, बल्कि अभ्यर्थियों के साथ ठगी का मामला है। परीक्षा निष्पक्ष रूप से संपन्न हुई है।”

रांची एसएसपी ने भी पुष्टि की कि असली प्रश्नपत्र सुरक्षित रहा और कोई लीक नहीं हुआ। सभी गिरफ्तार लोगों के खिलाफ तमाड़ थाना में केस दर्ज कर पूछताछ जारी है।

परीक्षा के दौरान पेपर लीक की अफवाहों ने सियासी बवाल खड़ा कर दिया। भाजपा और उसके युवा मोर्चा ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन किया।

रांची में भाजपा महानगर जिला ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला फूंका। कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस्तीफे और CBI जांच की मांग की।

पलामू, धनबाद, चाईबासा और अन्य जिलों में भी पुतला दहन और नारेबाजी हुई। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने JSSC कार्यालय पहुंचकर निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि झारखंड में लगातार परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठ रहे हैं और युवाओं का भविष्य खतरे में है।

उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा (विज्ञापन संख्या 06/2023) 8 साल बाद हुई। तीन पालियों में आयोजित इस परीक्षा में पेपर लीक की आशंका से पहले ही पुलिस ने सतर्कता बरती। JSSC ने अफवाहों को “बेबुनियाद” बताते हुए परीक्षा को सफल बताया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह अंतरराज्यीय था और पहले भी कई भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय रहा है।

परीक्षा संपन्न हो चुकी है, लेकिन राजनीतिक विरोध और जांच जारी है। विपक्ष CBI या न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि सरकार और आयोग इसे ठगी का मामला बता रहे हैं। युवाओं के भविष्य और परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उठे इस विवाद पर नजरें टिकी हुई हैं। आगे की जांच से और खुलासे की उम्मीद है।