ज्ञानेश कुमार को बड़ी राहत: राज्यसभा सभापति ने खारिज किया महाभियोग प्रस्ताव, विपक्ष को लगा करारा झटका

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नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संसद के बजट सत्र में विपक्ष द्वारा लाए गए महाभियोग प्रस्ताव से बड़ी राहत मिल गई है। राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उनके खिलाफ लाए गए महाभियोग नोटिस को खारिज कर दिया। इससे विपक्षी दलों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि बजट सत्र के अंतिम चरण में यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से भी इस नोटिस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई। सत्र समाप्त होने के साथ विपक्ष का यह रणनीतिक दांव फेल हो गया।

मार्च 2026 में विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार और विशेष गहन पुनरीक्षण में अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए महाभियोग का नोटिस दिया था।

• लोकसभा में 130 सांसदों और राज्यसभा में 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे।

• आरोपों में शामिल थे- बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम काटना, युवा और अल्पसंख्यक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना तथा चुनाव आयोग को सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करने का आरोप।

यह भारत के इतिहास में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पहला महाभियोग नोटिस था। विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहा था, जबकि चुनाव आयोग ने SIR को मतदाता सूची की नियमित सफाई और शुद्धिकरण का हिस्सा बताया था।

संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह है। नोटिस स्वीकार होने के बाद जांच समिति गठित होती और फिर दोनों सदनों में बहुमत से पास करना पड़ता। लेकिन राज्यसभा सभापति ने प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

इस फैसले से ज्ञानेश कुमार अपने पद पर बने हुए हैं और चुनाव आयोग की जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। विपक्षी नेताओं ने इस फैसले को सत्ताधारी दल के दबाव का परिणाम बताया है। TMC और कांग्रेस ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। वहीं, सरकार और BJP ने इसे विपक्ष की निराशा और राजनीतिक साजिश करार दिया।