कोलकाता, 08 अप्रैल: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण 23 अप्रैल से पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बड़े स्तर पर हाईटेक निगरानी व्यवस्था लागू कर दी है। राज्य के लगभग 80,000 मतदान केंद्रों पर कुल दो लाख के करीब कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिसमें हर बूथ पर अंदर और बाहर एक-एक कैमरा अनिवार्य है। संवेदनशील बूथों पर तीन कैमरे तक लग सकते हैं।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैमरे मतदाता की पसंद या वोटिंग की गोपनीयता का उल्लंघन नहीं करेंगे। अंदर का कैमरा मतदान प्रक्रिया, पीठासीन अधिकारी और एजेंटों की गतिविधियों पर नजर रखेगा, जबकि बाहर का कैमरा बूथ के आसपास भीड़, व्यवस्था और किसी भी अनधिकृत गतिविधि पर निगरानी रखेगा।
कंट्रोल रूम में माइक्रो ऑब्जर्वर 72 स्क्रीनों के जरिए एक साथ 500 बूथों की लाइव मॉनिटरिंग करेंगे। पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है, जो किसी गड़बड़ी या संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलर्ट जारी करेगा। अलर्ट मिलते ही सेक्टर ऑफिसर, पुलिस और ऑब्जर्वर को सूचना भेजी जाएगी, ताकि मिनटों में स्थिति को नियंत्रण में लाया जा सके।
प्रशासन का मानना है कि यह डबल सर्विलांस सिस्टम बूथ कैप्चरिंग, फर्जी वोटिंग और अन्य अनियमितताओं को प्रभावी ढंग से रोकने में अहम भूमिका निभाएगा। पूरे राज्य में रियल-टाइम वेबकास्टिंग अनिवार्य की गई है। यदि किसी बूथ पर वेबकास्टिंग नहीं होती है तो दोबारा मतदान की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।
चुनाव आयोग के इस कदम से मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में इस हाईटेक व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।