कुसुंबा (विष्णुगढ़), 02 अप्रैल: झारखंड के हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत कुसुंबा गांव में अंधविश्वास और नरबलि की काली छाया ने एक मासूम बच्ची की जान ले ली। पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें स्थानीय भाजपा नेता भीम राम, मृतका की मां रेशमी देवी और कथित तांत्रिक शांति देवी उर्फ भगतिनी शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना रामनवमी के आसपास की है। 12 वर्षीय बच्ची मंगला शोभायात्रा देखने गई थी, लेकिन घर नहीं लौटी। बाद में गांव के पास झाड़ियों में उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ। शुरू में इसे दुष्कर्म के बाद हत्या का मामला माना गया, जिस पर पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और भाजपा समेत विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।
मृतका की मां रेशमी देवी उम्र करीब 35 वर्ष अपने इकलौते बेटे की शारीरिक-मानसिक बीमारी से परेशान थी। गांव की तांत्रिक शांति देवी ने उसे समझाया कि बेटे पर “बुरा साया” है और इसे दूर करने के लिए “कुंवारी कन्या” की नरबलि जरूरी है। अंधविश्वास में फंसी मां ने इस सुझाव पर हामी भर दी।
पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि तांत्रिक के निर्देश पर बलि का दिन रामनवमी का चुना गया। रेशमी देवी ने बच्ची के पैर पकड़े, जबकि भीम राम उम्र करीब 40-45 वर्ष ने गला घोंटकर हत्या कर दी। मौत का कारण दम घुटना बताया गया। भीम राम मृतका की मां का कथित प्रेमी था और दोनों के अवैध संबंध को छिपाने का भी एक पहलू सामने आया है।
हजारीबाग पुलिस ने सभी तीनों आरोपियों से अपराध कबूल करा लिया है। उन पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 65(2) तथा POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई का दावा किया है।
घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। गांववासियों में गुस्सा है और अंधविश्वास की ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग हो रही है। पहले चरण में जांच में देरी को लेकर आलोचना हुई थी, लेकिन अब पुलिस के खुलासे के बाद मामला सुलझने की ओर है।