जनगणना 2027: बिना फेरे भी ‘पति-पत्नी’! स्थिर रिश्ता रखने वाले लिव-इन कपल को माना जाएगा शादीशुदा

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नई दिल्ली, 30 मार्च 2026: देश की आगामी जनगणना 2027 में एक बड़ा सामाजिक बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल, अगर खुद अपने रिश्ते को ‘स्थिर बंधन’ मानते हैं, तो उन्हें शादीशुदा जोड़े की श्रेणी में दर्ज किया जाएगा। यह जानकारी पूरी तरह से कपल की स्व-घोषणा पर आधारित होगी किसी विवाह प्रमाण-पत्र, रजिस्ट्री या अन्य दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी।

यह प्रावधान जनगणना के पहले चरण में लागू होगा, जो 1 अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला है। इस चरण में घरों की सूची, संपत्ति, सुविधाएं और परिवार की संरचना जैसी जानकारी ली जाएगी। दूसरे चरण में जनसंख्या और जाति गणना 2027 में होगी।

सरकार का कहना है कि यह कदम आधुनिक भारत के बदलते सामाजिक रिश्तों को बेहतर तरीके से प्रतिबिंबित करने के लिए उठाया गया है। पहले की जनगणनाओं में भी स्व-घोषणा पर आधारित जानकारी ली जाती थी, लेकिन इस बार लिव-इन संबंधों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। नागरिक घर बैठे सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर जानकारी भर सकेंगे, जो अंग्रेजी और 15 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा। साथ ही लगभग 30 लाख फील्ड कर्मचारी भी घर-घर जाकर डेटा इकट्ठा करेंगे।

• कोई दस्तावेज नहीं: सिर्फ कपल की अपनी घोषणा मायने रखेगी।

• प्रभाव: विवाहित जोड़ों की संख्या में बढ़ोतरी दिख सकती है, क्योंकि स्थिर लिव-इन कपल भी इसमें शामिल होंगे।

• कानूनी दर्जा नहीं: यह केवल जनगणना के आंकड़ों के लिए है। लिव-इन संबंधों को कानूनी विवाह का दर्जा या अधिकार नहीं मिलेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव युवा पीढ़ी के जीवनशैली को सरकारी आंकड़ों में शामिल करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि कुछ सामाजिक संगठनों ने इसे पारंपरिक भारतीय परिवार व्यवस्था पर प्रभाव डालने वाला बताते हुए चिंता जताई है।

जनगणना आयुक्त ने कहा कि डेटा संग्रह “लोगों की सर्वोत्तम जानकारी और विश्वास” पर आधारित होगा।