रांची, 25 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म से किसी अन्य धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) में परिवर्तन करने पर अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा तत्काल और पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है। ऐसे व्यक्ति SC/ST एक्ट के तहत संरक्षण या आरक्षण का लाभ नहीं ले सकते। अदालत ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के खंड 3 के तहत यह प्रतिबंध पूर्ण और बिना किसी अपवाद के है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक चंपाई सोरेन ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे ऐतिहासिक बताया। सोशल मीडिया पर अपने बयान में उन्होंने कहा, “आज सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में यह तय कर दिया कि धर्म परिवर्तन के बाद आप अपनी मूल पहचान को मिले SC/ST Act समेत तमाम अधिकार खो देते हैं। धर्मांतरण से अनुसूचित जाति को बचाने हेतु सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय का स्वागत है।”
चंपाई सोरेन ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस फैसले के अनुरूप नियमों और कानूनों में आवश्यक संशोधन करें, ताकि अनुसूचित जाति और जनजाति के आरक्षण का दुरुपयोग रोका जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो व्यक्ति अपनी मूल परंपरा, संस्कृति और सामाजिक व्यवस्था छोड़कर धर्म परिवर्तन कर लेता है, उसे मूल समुदाय के आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।
झारखंड में आदिवासी समाज में लंबे समय से चल रहे धर्मांतरण के मुद्दे पर चंपाई सोरेन सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पहले भी कहा था कि जो लोग आदिवासी जीवनशैली त्याग देते हैं, उन्हें ST आरक्षण का फायदा नहीं मिलना चाहिए। इस फैसले से झारखंड में सियासत तेज हो गई है और आदिवासी संगठन भी इस पर चर्चा कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और एन.वी. अंजारिया ने कहा कि SC दर्जा मुख्य रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म से जुड़ा है। किसी अन्य धर्म को अपनाने पर व्यक्ति अपनी मूल जाति की पहचान खो देता है। हालांकि, अनुसूचित जनजाति के मामले में यह पूरी तरह धर्म-आधारित नहीं है, बल्कि रीति-रिवाज, सामाजिक संगठन और समुदाय की स्वीकृति पर निर्भर करता है।
विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है, जबकि कई आदिवासी नेता इस फैसले को आदिवासी संस्कृति की रक्षा के रूप में देख रहे हैं।
चंपाई सोरेन ने केंद्र से ST के संदर्भ में भी समान व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के अनुसार केवल निर्दिष्ट धर्मों के लोगों को ही SC दर्जा मिलता है। यह फैसला पूरे देश में SC/ST आरक्षण और धर्मांतरण की बहस को नई दिशा दे सकता है।