रांची/गुवाहाटी, 23 मार्च 2026: झारखंड मुक्ति मोर्चा ने असम विधानसभा चुनाव 2026 में कांग्रेस के साथ गठबंधन की सभी संभावनाओं को खत्म कर दिया है। लंबी चली सीट-शेयरिंग वार्ता विफल रहने के बाद पार्टी ने अकेले मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है। झामुमो अब 19 विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी, जबकि बेहाली सीट सीपीआई(एमएल) यानी माले के लिए छोड़ दी गई है।
पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद पांडेय ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कांग्रेस महज 7 सीटें देने पर अड़ी रही, जबकि झामुमो ने आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ को देखते हुए अधिक सीटों की मांग की थी। 22 मार्च की शाम तक दोनों दलों के बीच अंतिम दौर की बातचीत चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी।
झामुमो पहले असम में 25 से 31 सीटों तक चुनाव लड़ने की तैयारी में थी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दो बार असम का दौरा किया था और चाय बागान क्षेत्रों तथा झारखंड मूल के ट्राइबल वोटर्स को साधने की रणनीति बनाई थी। पार्टी का फोकस मुख्य रूप से 19 एसटी आरक्षित सीटों पर था, जहां उसकी अच्छी पहुंच मानी जाती है।
इस फैसले से विपक्षी एकता को बड़ा झटका लगा है। असम में कुल 126 सीटों पर 9 अप्रैल 2026 को मतदान होना है। कांग्रेस ने पहले ही 100 से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं और अन्य छोटे दलों से गठजोड़ किया है, लेकिन झामुमो के अलग चलने से ट्राइबल वोटों में बंटवारा होने की आशंका बढ़ गई है।
झामुमो ने असम में ‘तीर-कमान’ चिह्न पर चुनाव लड़ने की तैयारी पूरी कर ली है और संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि यह कदम असम में अपनी अलग पहचान बनाने और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए महत्वपूर्ण है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झामुमो का यह फैसला असम में भाजपा-विरोधी वोटों को और कमजोर कर सकता है, जबकि हेमंत सोरेन की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा को भी नई चुनौती मिली है।