रांची, 22 मार्च 2026: झारखंड की राजनीति में राज्यसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन से खाली पड़ी एक सीट और भाजपा सांसद दीपक प्रकाश के कार्यकाल 21 जून को समाप्त होने से खाली हो रही दूसरी सीट पर मई-जून में मतदान होने की संभावना है। इंडिया गठबंधन के पास मजबूत संख्याबल होने से दोनों सीटें जीतने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जबकि एनडीए खेमे में हताशा के साथ-साथ क्रॉस-वोटिंग या बिखराव की उम्मीद बनी हुई है।
झारखंड विधानसभा में कुल 81 सदस्य हैं, जहां एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए लगभग 28 विधायकों का समर्थन जरूरी है। 2024 विधानसभा चुनाव के बाद पार्टियों की स्थिति- इंडिया गठबंधन 56 विधायक और एनडीए के पास कुल 24 विधायक वर्तमान में मौजूद है।
झामुमो ने दोनों सीटों पर अपना दावा मजबूत किया है और पार्टी सूत्रों के मुताबिक हेमंत सोरेन सरकार इसे अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन बनाने की तैयारी में है। हालांकि, कांग्रेस ने कम से कम एक सीट पर अपना प्रत्याशी उतारने की मांग की है, जिससे गठबंधन के अंदर खींचतान शुरू हो गई है। कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने स्पष्ट कहा है कि गठबंधन में हिस्सेदारी के आधार पर एक सीट उनका हक बनता है।
दूसरी ओर, एनडीए के पास अकेले जीत की संख्या नहीं है। बिहार में हालिया राज्यसभा चुनावों में एनडीए की क्लीन स्वीप से उत्साहित भाजपा झारखंड में भी ‘ऑपरेशन लोटस’ या किसी बड़े राजनीतिक उलटफेर की कोशिश में जुटी दिख रही है, लेकिन वर्तमान संख्याबल इसे मुश्किल बना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर महागठबंधन में एकता बनी रही और कोई क्रॉस-वोटिंग नहीं हुई, तो दोनों सीटें इंडिया ब्लॉक के खाते में जा सकती हैं। वहीं, एनडीए के लिए जीत तभी संभव है जब गठबंधन में कोई बड़ा दरार पड़े या कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम हो।
चुनाव आयोग की अधिसूचना जल्द जारी होने की उम्मीद है। नामांकन और प्रत्याशियों की घोषणा के साथ सियासी हलचल और तेज होने वाली है। क्या झारखंड में बिहार जैसा ड्रामा दोहराया जाएगा या महागठबंधन अपनी एकता साबित करेगा? आने वाले दिनों में यह साफ होगा।