रांची, 22 मार्च 2026: झारखंड कांग्रेस में बढ़ते आंतरिक कलह के बीच पूर्व विधायक और AICC राष्ट्रीय सचिव अम्बा प्रसाद ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। अपने पिता और पूर्व कृषि मंत्री योगेंद्र साव को तीन साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने के बाद अम्बा प्रसाद ने खुले तौर पर असंतोष जताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन्हें और रैयतों की लड़ाई में अकेला छोड़ दिया, जबकि हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ उनकी आवाज बुलंद है।
अम्बा प्रसाद ने हाल ही में एक लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हमारी लड़ाई सिस्टम के खिलाफ है… पार्टी और सरकार दोनों जनता के समर्थन से चलती हैं, अब जनता ही निर्धारित करे कि कौन गलत है।” उन्होंने NTPC और भूमि अधिग्रहण विवाद में पुलिस-प्रशासन पर कंपनी के पक्ष में होने का आरोप लगाते हुए कहा कि “घायल शेर और भी खतरनाक होता है” और वे 2013 के कानून को लागू करवाकर ही दम लेंगे।
पिछले दिनों उनके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हुई, जिसके बाद उन्होंने हेमंत सरकार पर जमकर बरसीं। अम्बा प्रसाद ने आरोप लगाया कि सरकार रैयतों के हक छीन रही है और कांग्रेस ने उनका साथ नहीं दिया। योगेंद्र साव के निष्कासन को “बिना नोटिस” बताते हुए उन्होंने पार्टी पर सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश कांग्रेस “हेडमास्टर की डाँट” पर चुप है।
सूत्रों के अनुसार, अम्बा प्रसाद पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हो रही हैं और उनकी नाराजगी इतनी गहरी है कि राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं कि वे जल्द ही कांग्रेस छोड़ सकती हैं। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि उनकी राजनीति पर “खतरा मंडरा रहा है” और वे अन्य विकल्प तलाश रही हैं।
झारखंड की सियासत में JMM-कांग्रेस गठबंधन के बीच यह तनाव पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। अम्बा प्रसाद बड़कागाँव क्षेत्र में लोकप्रिय हैं और विस्थापितों-रैयतों के मुद्दे पर उनकी सक्रियता जारी है। कांग्रेस उच्च कमान से न्याय की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि “केंद्रीय नेतृत्व को असलियत पता चलेगी तो न्याय मिलेगा”।
विपक्षी दल इसे कांग्रेस की कमजोरी बताकर हमला बोल रहे हैं, जबकि अम्बा प्रसाद की अगली कदम पर सबकी नजर टिकी है। क्या वे पार्टी में रहकर सुधार की लड़ाई लड़ेंगी या अलग रास्ता चुनेंगी? आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होगी।