रांची, 20 मार्च: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सदन में सरकार की ओर से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सबसे अधिक सरस्वती पूजा होती है, लेकिन मेधावी बच्चे जापान जैसे देशों में पैदा होते हैं या जाते हैं। इसी तरह सबसे अधिक लक्ष्मी पूजा भी यहां होती है, फिर भी अमीर लोग विदेशों में रहते हैं। विश्वकर्मा पूजा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ तो गड़बड़ है… पूजा-पाठ ज्यादा करते हैं, लेकिन पढ़ाई-लिखाई कम, फिर विश्व गुरु कैसे बनेंगे?”
यह टिप्पणी विपक्षी दल भाजपा के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। भाजपा ने इसे हिंदू आस्था पर सीधा हमला करार दिया है।
झारखंड भाजपा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने कड़ी निंदा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री का बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा, विश्वकर्मा पूजा और रामनवमी जैसे पवित्र पर्वों का खुला अपमान है। एक ओर सरकारी संसाधनों से इफ्तार जैसे आयोजन होते हैं, दूसरी ओर हिंदू त्योहारों पर तंज? यह दोहरा मापदंड है और हिंदू समाज की सहनशीलता का फायदा उठाने की कोशिश है।”
रांची सांसद एवं केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सनातन परंपरा का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने पूछा, “इफ्तार पर चुप्पी, लेकिन हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी? यह हिंदू विरोधी सोच है। पूजा से मानसिक शांति और सद्बुद्धि मिलती है, जो विकास के लिए जरूरी है।”
सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने इसे “हिंदू नफरत” और “आस्था का मजाक” बताया, जबकि कुछ ने मुख्यमंत्री के इरादे को विकास और शिक्षा पर जोर देने के रूप में देखा। हालांकि, अधिकांश प्रतिक्रियाएं नकारात्मक हैं।
मुख्यमंत्री या झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सफाई या माफी नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद झारखंड की संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को भड़का सकता है और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों में असर डाल सकता है।
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सरस्वती-लक्ष्मी पूजा पर टिप्पणी से घिरे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, BJP ने कहा- हिंदुओं की आस्था का खुला अपमान
रांची, 20 मार्च: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के एक बयान ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। सदन में सरकार की ओर से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि भारत में सबसे अधिक सरस्वती पूजा होती है, लेकिन मेधावी बच्चे जापान जैसे देशों में पैदा होते हैं या जाते हैं। इसी तरह सबसे अधिक लक्ष्मी पूजा भी यहां होती है, फिर भी अमीर लोग विदेशों में रहते हैं। विश्वकर्मा पूजा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, “कुछ तो गड़बड़ है… पूजा-पाठ ज्यादा करते हैं, लेकिन पढ़ाई-लिखाई कम, फिर विश्व गुरु कैसे बनेंगे?”
यह टिप्पणी विपक्षी दल भाजपा के लिए बड़ा मुद्दा बन गई है। भाजपा ने इसे हिंदू आस्था पर सीधा हमला करार दिया है।
झारखंड भाजपा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अमर बाउरी ने कड़ी निंदा करते हुए कहा, “मुख्यमंत्री का बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि सरस्वती पूजा, लक्ष्मी पूजा, विश्वकर्मा पूजा और रामनवमी जैसे पवित्र पर्वों का खुला अपमान है। एक ओर सरकारी संसाधनों से इफ्तार जैसे आयोजन होते हैं, दूसरी ओर हिंदू त्योहारों पर तंज? यह दोहरा मापदंड है और हिंदू समाज की सहनशीलता का फायदा उठाने की कोशिश है।”
रांची सांसद एवं केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सनातन परंपरा का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने पूछा, “इफ्तार पर चुप्पी, लेकिन हिंदू देवी-देवताओं पर टिप्पणी? यह हिंदू विरोधी सोच है। पूजा से मानसिक शांति और सद्बुद्धि मिलती है, जो विकास के लिए जरूरी है।”
सोशल मीडिया पर भी यह बयान तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स ने इसे “हिंदू नफरत” और “आस्था का मजाक” बताया, जबकि कुछ ने मुख्यमंत्री के इरादे को विकास और शिक्षा पर जोर देने के रूप में देखा। हालांकि, अधिकांश प्रतिक्रियाएं नकारात्मक हैं।
मुख्यमंत्री या झारखंड मुक्ति मोर्चा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक सफाई या माफी नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद झारखंड की संवेदनशील धार्मिक भावनाओं को भड़का सकता है और आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों में असर डाल सकता है।
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