झारखंड विधानसभा बजट सत्र में हंगामा: डुमरी विधायक जयराम महतो का विवादित बयान सदन से हटाया गया

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रांची, 10 मार्च: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के 10वें दिन बुधवार को डुमरी विधायक जयराम महतो ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के धनबाद दौरे वाले बयान का हवाला देकर सदन में तीखी बहस छेड़ दी, जिसके बाद अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने उनके उस हिस्से को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश दे दिया।

विधायक जयराम महतो ने श्रम, नियोजन एवं कौशल विकास तथा उद्योग विभाग के अनुदान मांग पर कटौती प्रस्ताव के दौरान कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में धनबाद में बयान दिया था कि यदि आउटसोर्सिंग या निजी कंपनियां 75% स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं देतीं, तो स्थानीय लोग कंपनी पर कब्जा कर लें।

इस बयान पर सत्ता पक्ष ने तीव्र आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने कहा कि जयराम महतो के पास इस बयान की कोई प्रमाणिकता नहीं है और सदन के बाहर दिए गए किसी भी बयान को बिना अध्यक्ष की अनुमति के सदन में नहीं उठाया जा सकता। उन्होंने तुरंत इसे कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिस पर अध्यक्ष ने निर्देश जारी कर दिया।

यह घटना झारखंड में 75% स्थानीय रोजगार कोटा नीति के लंबे विवाद को फिर उजागर करती है। राज्य सरकार ने 2021 में निजी क्षेत्र में 40 हजार रुपये तक की सैलरी वाली नौकरियों में 75% स्थानीय आरक्षण का कानून बनाया था, लेकिन झारखंड हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने धनबाद में आउटसोर्सिंग कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा था कि 75% स्थानीय नियुक्ति अनिवार्य होगी, अन्यथा सख्त कार्रवाई होगी जिसे कुछ लोगों ने ‘कब्जा’ के रूप में व्याख्या की।

विपक्षी विधायक ने इसी का इस्तेमाल सरकार पर हमला करने के लिए किया, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे असत्य और अनुचित करार दिया। यह मामला स्थानीय युवाओं के रोजगार, निजी निवेश और राजनीतिक बयानबाजी के बीच तनाव को दर्शाता है। सदन में आगे इस मुद्दे पर क्या बहस होती है, यह देखना बाकी है।