रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड में पुल मरम्मत के कारण कई ट्रेनों का रूट बदला गया है।

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रांची, 7 मार्च 2026: झारखंड के रांची-लोहरदगा-टोरी रेलखंड पर कोयल नदी के पुल संख्या 115 (नगजुआ-लोहरदगा के बीच) में आई दरार के कारण मरम्मत कार्य जारी होने से ट्रेन सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं। जनवरी 2026 की शुरुआत में खोजी गई इस तकनीकी खामी के बाद रेलवे ने सुरक्षा के मद्देनजर इस रूट पर सीधा परिचालन पूरी तरह रोक दिया था, जिससे क्षेत्र के हजारों यात्रियों को रोजाना असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, पुल के पिलर संख्या 4 और 5 में दरार पाई गई थी, जिसके बाद एहतियातन सभी ट्रेनों का संचालन निलंबित कर दिया गया। मरम्मत कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है, जिसमें स्टील गार्डर लगाना, पिलर की जैकेटिंग और अन्य मजबूती के उपाय शामिल हैं। रांची रेल मंडल ने बताया कि काम अंतिम चरण में है और 15 मार्च 2026 के बाद इस रूट पर ट्रेनों का सामान्य परिचालन बहाल होने की संभावना है। हालांकि, कुछ स्रोतों में 20 मार्च या 31 मार्च तक डायवर्जन जारी रहने की बात कही गई है।

• एक्सप्रेस ट्रेनों का रूट परिवर्तन: राजधानी एक्सप्रेस (रांची-नई दिल्ली), सासाराम एक्सप्रेस, चोपन एक्सप्रेस सहित कुल 10 से अधिक लंबी दूरी की ट्रेनें अब बरकाकाना, मेसरा और टाटीसिलवे होकर चल रही हैं। इससे यात्रा समय में 2-4 घंटे की वृद्धि हो रही है।

• पैसेंजर/मेमू ट्रेनें रद्द: रांची-लोहरदगा मेमू और पैसेंजर ट्रेनें (जैसे 68017/68018, 68027/68028 आदि) काफी हद तक रद्द हैं या रांची से नगजुआ/इरगांव तक सीमित हैं। लोहरदगा स्टेशन मार्च तक बंद रहने की स्थिति बनी हुई है।

• इस रूट पर रोजाना लगभग 8,000 यात्री सफर करते थे, जिससे लोहरदगा और आसपास के इलाकों में बस स्टैंडों पर भीड़ बढ़ गई है। रेलवे ने लोहरदगा से इरगांव तक बस सेवाएं शुरू की हैं ताकि यात्रियों को राहत मिल सके।

दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक और रांची डिवीजन के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया और 20 अन्य पुलों का जियो-टेक्निकल सर्वे भी कराया जा रहा है। रेलवे का कहना है कि पूरी मरम्मत मई 2026 तक पूरी हो जाएगी, लेकिन आंशिक परिचालन मार्च मध्य से शुरू करने का प्रयास है।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि ट्रेन की स्थिति की पुष्टि NTES ऐप, IRCTC वेबसाइट या रेलवे हेल्पलाइन से करें। रेलवे ने यात्रियों की असुविधा कम करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं जुटाई हैं, लेकिन क्षेत्रवासियों का कहना है कि यह लाइफलाइन रूट जल्द बहाल हो।