कोलकाता/नई दिल्ली, 6 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से महज कुछ हफ्ते पहले राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। यह घटनाक्रम राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है, जहां बोस और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच पिछले वर्षों में कई बार टकराव देखने को मिला था।
डॉ. बोस ने दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में अपना त्यागपत्र सौंपा। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने पीटीआई को बताया, “मैंने साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहकर पर्याप्त समय बिताया है। अब मैं दिल्ली में हूं।” उन्होंने इस्तीफे के ठोस कारणों का खुलासा नहीं किया, हालांकि कुछ सूत्रों ने स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का जिक्र किया है।
नवंबर 2022 में पदभार संभालने वाले बोस का कार्यकाल 2027 तक था। उनके इस्तीफे के साथ ही राष्ट्रपति ने कई राज्यों में राज्यपालों और उपराज्यपालों के बड़े फेरबदल की घोषणा की है। पश्चिम बंगाल के नए राज्यपाल तमिलनाडु के वर्तमान राज्यपाल आर.एन. रवि को अतिरिक्त प्रभार में नियुक्त किया गया है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने X पर पोस्ट कर कहा, “श्री सी.वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से मैं हैरान और गहरी चिंता में हूं। इस्तीफे के कारण मुझे नहीं पता, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में आश्चर्य नहीं होगा अगर केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा कुछ राजनीतिक हितों के लिए दबाव डाला गया हो।” उन्होंने आरोप लगाया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति में उनसे कोई परामर्श नहीं किया गया, जो सहकारी संघवाद की भावना के खिलाफ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव चुनावी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। बोस ने हाल ही में खुद को पश्चिम बंगाल का मतदाता भी बनाया था, जिससे उनकी सक्रिय भूमिका की चर्चा थी। उनके इस्तीफे से राज्य में टीएमसी और केंद्र के बीच तनाव और बढ़ सकता है।
राज्य में अप्रैल-मई 2026 में विधानसभा चुनाव होने की संभावना है। यह इस्तीफा चुनावी माहौल को और गरमा सकता है। स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।