गिरिडीह सांसद ने लोकसभा में उठाया झारखंड में लंबित पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का मामला राज्य सरकार पर प्रक्रियात्मक लापरवाही का गंभीर आरोप 

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रांची/नई दिल्ली, 26 फरवरी 2026: झारखंड में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति पिछले तीन वर्षों से लंबित होने के कारण हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इस गंभीर मुद्दे को गिरिडीह लोकसभा सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत जोरदार तरीके से उठाया।

सांसद चौधरी ने राज्य सरकार पर प्रक्रियात्मक लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का समय पर उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, डेटा रिपोर्टिंग में कमी रही और कई वित्तीय वर्षों में समुचित मांग ही नहीं भेजी गई। विशेष रूप से ओबीसी, ईबीसी एवं डीएनटी वर्ग के लिए वर्ष 2021-22 में जारी 52.15 करोड़ रुपये के विरुद्ध उपयोगिता प्रमाणपत्र समय पर जमा नहीं किया गया, जो बाद में 29 दिसंबर 2023 को भेजा गया।

सांसद ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा दिए गए लिखित जवाब का हवाला देते हुए कहा कि समस्या केंद्र स्तर पर नहीं, बल्कि राज्य स्तर की प्रशासनिक उदासीनता और लापरवाही के कारण है। इससे झारखंड के लगभग 6 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को फीस, हॉस्टल खर्च और अन्य शैक्षणिक जरूरतों में भारी दिक्कत आ रही है। कई छात्र ड्रॉपआउट होने की कगार पर पहुंच गए हैं।

चंद्रप्रकाश चौधरी ने स्पष्ट किया कि छात्रों के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है ताकि लंबित राशि जारी की जा सके और ऐसी प्रक्रियात्मक कमियों को दूर करने के लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। सांसद ने सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को साझा करते हुए कहा, “छात्रों का भविष्य दांव पर है, राज्य सरकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

यह मुद्दा झारखंड में काफी समय से चर्चा में है। इससे पहले भी सांसद चौधरी ने लोकसभा में इसी तरह के सवाल उठाए थे। छात्र संगठन और विपक्षी दल भी लगातार प्रदर्शन कर इसकी मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।