झारखंड में छात्रवृत्ति संकट: विधानसभा और लोकसभा दोनों सदनों में उठा मुद्दा

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रांची, 26 फरवरी 2026: झारखंड में छात्रवृत्ति के लंबित भुगतान का मुद्दा अब राज्य विधानसभा और लोकसभा दोनों सदनों में गरमाया हुआ है। आज झारखंड विधानसभा के बजट सत्र में डुमरी विधायक जयराम महतो ने इसे जोरदार तरीके से उठाया, जबकि कल गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी ने लोकसभा में नियम 377 के तहत केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया था।

विधायक जयराम महतो ने सदन में सरकार से सवाल किया कि ई-कल्याण पोर्टल के माध्यम से प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति क्यों एक वर्ष से अधिक समय से अटकी हुई है। उन्होंने एक छात्र के उदाहरण देते हुए भावुक अपील की कि गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ाई के लिए तरस रहे हैं। महतो ने कहा, “मेरा घर नीलाम कर दीजिए, लेकिन छात्रों की छात्रवृत्ति दे दीजिए।” उन्होंने सुझाव दिया कि जब तक भुगतान नहीं होता, तब तक छात्रों को ब्याज-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाए या विधायक निधि से सहायता दी जाए।

कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने जवाब में स्पष्ट किया कि क्लास 1 से 8 तक की छात्रवृत्ति में कोई समस्या नहीं है, लेकिन मीट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक स्तर पर केंद्र से फंड न मिलने और प्रक्रियात्मक दिक्कतों के कारण देरी हो रही है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि विभाग ने नियम में संशोधन के लिए पत्र लिखा है और जल्द ही सभी लंबित छात्रवृत्तियां जारी कर दी जाएंगी।

कल लोकसभा में गिरिडीह सांसद चंद्र प्रकाश चौधरी  ने झारखंड के लगभग सात लाख एसटी, एससी, ओबीसी और अल्पसंख्यक छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति के तीन वर्षों से बाधित होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस देरी से कई छात्र ड्रॉपआउट की कगार पर पहुंच गए हैं। सांसद ने केंद्र सरकार से तुरंत अपना हिस्सा जारी करने और राज्य की प्रक्रियात्मक लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा बच्चों का अधिकार है और छात्रवृत्ति उनका हक है।

यह मुद्दा झारखंड में व्यापक असंतोष का कारण बना हुआ है, क्योंकि हजारों-लाखों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। छात्र संगठन, विपक्ष और अभिभावक लगातार विरोध जता रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार ने ई-कल्याण पोर्टल में सुधार तथा फंड जारी होने के बाद भुगतान तेज करने का वादा किया है। दोनों सदनों में उठाए गए सवालों से उम्मीद है कि जल्द स्थायी समाधान निकलेगा और छात्रों को उनका हक मिलेगा।