रांची में स्ट्रांग रूम सीसीटीवी स्क्रीन घंटों बंद, बैलेट बॉक्स निगरानी पर गंभीर सवाल

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रांची, 25 फरवरी 2026: झारखंड के नगर निकाय चुनाव में मतदान संपन्न होने के बाद अब मतगणना की तैयारियां जोरों पर हैं। 27 फरवरी को होने वाली मतगणना से पहले राजधानी रांची के ट्रांसपोर्ट नगर में स्थापित स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी स्क्रीन के घंटों तक बंद रहने की घटना ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्याशियों और उनके चुनाव एजेंटों के लिए बनाए गए लाइव व्यूइंग रूम में एलसीडी/सीसीटीवी स्क्रीन डेढ़ से दो घंटे से अधिक समय तक बंद पड़ी रही। कुछ रिपोर्टों में इसे कई घंटों तक का बताया गया है। इससे बैलेट पेपर बॉक्स की निरंतर निगरानी प्रभावित हुई, जिसके चलते प्रत्याशी और एजेंटों में भारी नाराजगी फैल गई। कई प्रत्याशियों ने इसे छेड़छाड़ की आशंका के रूप में देखा और प्रशासन पर लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक का आरोप लगाया।

भाजपा महानगर अध्यक्ष वरुण कुमार ने इस मुद्दे पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि स्ट्रांग रूम जैसे उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में सीसीटीवी का अचानक बंद होना संदिग्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान सत्ताधारी दल झामुमो से जुड़े कुछ लोगों की मौजूदगी भी देखी गई, जो स्थिति को और संदिग्ध बनाती है। भाजपा ने जिला प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगते हुए जांच की मांग की है और इसे लोकतंत्र पर प्रहार करार दिया।

भाजपा समर्थित मेयर प्रत्याशी रौशनी खलको ने भी सोशल मीडिया पर सीसीटीवी बंद होने का दावा किया, जिसके बाद उनके समर्थक और कार्यकर्ता भड़क उठे। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में भी इस घटना का जिक्र है, जहां बताया गया कि प्रत्याशियों के लिए अलग से बनाए गए सीसीटीवी लाइव कक्ष की स्क्रीन लंबे समय तक खराब या बंद रही।

यह चुनाव बैलेट पेपर से हो रहा है, इसलिए स्ट्रांग रूम की निगरानी और पारदर्शिता पर विशेष जोर है। प्रशासन ने बैलेट बॉक्स को कड़ी सुरक्षा के साथ सील किया है, लेकिन सीसीटीवी व्यवस्था में आई खामी ने विपक्षी दलों को हमला बोलने का मौका दे दिया है। फिलहाल जिला प्रशासन या राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

प्रत्याशी और राजनीतिक दल अब चुनाव आयोग से तत्काल जांच और वैकल्पिक निगरानी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं, ताकि मतगणना से पहले किसी भी संदेह को दूर किया जा सके। यह घटना झारखंड के स्थानीय निकाय चुनावों की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रही है, जहां पहले ही नोटा की अनुपस्थिति और बैलेट पेपर व्यवस्था को लेकर विवाद हुआ था।