ढाका, 13 फरवरी: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने भारी बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि जमात-ए-इस्लामी को अपेक्षाकृत कम सफलता मिली है। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद पहला संसदीय चुनाव था, जिसमें अवामी लीग को भाग लेने से रोका गया था।
प्रारंभिक और आधिकारिक परिणामों के अनुसार, बीएनपी और उसके सहयोगियों ने 299 में से लगभग 209-212 सीटें जीती हैं, जो दो-तिहाई बहुमत से अधिक है। इसके विपरीत, जमात-ए-इस्लामी और उसके 11-पार्टी गठबंधन को 68-77 सीटें मिली हैं, जो पार्टी के लिए अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन तो है, लेकिन यह बीएनपी की तुलना में काफी पीछे है। छात्र नेताओं द्वारा गठित नेशनल सिटिजन पार्टी को मात्र 6 सीटें मिलीं।
जमात-ए-इस्लामी ने चुनाव पूर्व काफी आत्मविश्वास दिखाया था और इसे छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ समर्थन तथा अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के प्रभाव का लाभ मिलने की उम्मीद थी। पार्टी ने परिणामों की अखंडता पर सवाल उठाए हैं और कुछ अनियमितताओं का आरोप लगाया है, लेकिन बीएनपी ने स्पष्ट जीत का दावा किया है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बधाई संदेश आने शुरू हो गए हैं। बीएनपी के अध्यक्ष तारिक रहमान को अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना है।
यह परिणाम बांग्लादेश की राजनीति में महत्वपूर्ण संकेत देता है। कट्टरपंथी विचारधारा वाली जमात-ए-इस्लामी की अपेक्षाकृत कमजोर स्थिति से साफ है कि मतदाताओं ने मुख्यधारा की राजनीतिक शक्ति को प्राथमिकता दी है। बीएनपी की निर्णायक जीत से देश ने स्थिरता और मध्यमार्गी दृष्टिकोण को अपनाने का संकेत दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि इससे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लिए भविष्य में राजनीतिक वापसी का रास्ता संभव हो सकता है, क्योंकि अवामी लीग की मुख्यधारा वाली छवि अभी भी जीवित है और बीएनपी की सरकार के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा कि विपक्षी ताकतें कैसे उभरती हैं। फिलहाल, यह चुनाव बांग्लादेश के लोकतंत्र में एक नया अध्याय खोलता दिख रहा है, जहां कट्टरपंथ को स्पष्ट रूप से अस्वीकार किया गया है।