रामगढ़, 05 फरवरी 2026: राधा गोविंद विश्वविद्यालय के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आज गुरुवार को “हाइड्रोजन-समृद्ध ईंधन एवं उसके आंतरिक दहन इंजन में अनुप्रयोग” विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का सफल आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मुख्य रूप से विद्यार्थियों को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, पर्यावरण संरक्षण और उभरती इंजीनियरिंग तकनीकों से अवगत कराने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था।
कार्यक्रम में सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला के सहायक प्राध्यापक विनय प्रकाश चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने हाइड्रोजन-समृद्ध ईंधन की मूल अवधारणा, इसकी कार्यप्रणाली तथा पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में इसके तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों पर विस्तृत प्रकाश डाला। व्याख्यान के दौरान हाइड्रोजन के उपयोग से उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा दक्षता में वृद्धि और भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा आवश्यकताओं पर गहन चर्चा हुई।
विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बी.एन. साह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, “वर्तमान समय में ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियाँ पूरी दुनिया के लिए गंभीर मुद्दा बन चुकी हैं। ऐसे में हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक और स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर आधारित शोध, नवाचार और जागरूकता की बहुत आवश्यकता है। यह व्याख्यान हमारे विद्यार्थियों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और व्यावहारिक रूप से उपयोगी सिद्ध होगा।”
कार्यक्रम की सराहना करते हुए सचिव प्रियंका कुमारी ने आयोजन समिति को सफलता के लिए बधाई दी। कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने अपने संबोधन में जोर दिया कि ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यान विद्यार्थियों को वैश्विक तकनीकी परिवर्तनों से जोड़ने और उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का एक सशक्त माध्यम हैं।
इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी संकाय के विभागाध्यक्ष डॉ. अवनीश कुमार ने कार्यक्रम के उद्देश्यों एवं महत्व पर प्रकाश डाला तथा संपूर्ण आयोजन का कुशल संचालन भी किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार, प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार, इंजीनियरिंग संकाय के अन्य व्याख्याता तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे यह सत्र न केवल शैक्षणिक रूप से समृद्ध रहा, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा विकल्पों पर विचार-विमर्श का एक महत्वपूर्ण मंच भी साबित हुआ।