बोधगया-राजगीर-नालंदा भ्रमण से विद्यार्थियों में जागृत हुई सांस्कृतिक-ऐतिहासिक चेतना
रामगढ़, 3 फरवरी 2026: राधा गोविन्द विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने अनुभवात्मक शिक्षा की एक शानदार मिसाल पेश की है। विभाग द्वारा 30 एवं 31 जनवरी 2026 को आयोजित दो दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण बोधगया, राजगीर और नालंदा में पूर्ण रूप से सफल रहा। इस यात्रा ने विद्यार्थियों में शैक्षणिक चेतना, सांस्कृतिक बोध तथा ऐतिहासिक समझ को व्यापक रूप से विस्तारित किया।
यह भ्रमण कक्षा-कक्ष की परंपरागत सीमाओं से आगे बढ़कर ज्ञान को प्रत्यक्ष अनुभव से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। विश्वविद्यालय के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने इसमें सक्रिय भाग लिया। यात्रा के दौरान बोधगया में भगवान बुद्ध की बौद्ध परंपरा, राजगीर की प्राचीन ऐतिहासिक विरासत तथा नालंदा के विश्व-प्रसिद्ध प्राचीन विश्वविद्यालय के अवशेषों को निकट से देखने-समझने का अवसर मिला। इन स्थलों ने विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान-परंपरा की गहन महानता से रूबरू कराया।
भ्रमण के दौरान संबंधित स्थलों के ऐतिहासिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। विश्वविद्यालय प्रशासन की सक्रिय भूमिका एवं सहयोग से यह कार्यक्रम अत्यंत सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं अनुशासित ढंग से संपन्न हुआ।
इस सफल आयोजन का श्रेय मुख्य रूप से कुलाधिपति बी. एन. साह, विश्वविद्यालय सचिव प्रियंका कुमारी, कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि, कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल, वित्त एवं लेखा पदाधिकारी डॉ. संजय कुमार, परीक्षा नियंत्रक प्रो. (डॉ.) अशोक कुमार तथा प्रबंध समिति सदस्य अजय कुमार को जाता है।
कुलाधिपति बी. एन. साह ने अपने संदेश में कहा, “शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों के बौद्धिक, नैतिक एवं सांस्कृतिक विकास का एक सशक्त माध्यम है।” सचिव प्रियंका कुमारी ने जोर दिया कि अनुभव आधारित शिक्षा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है तथा ऐसे भ्रमण उनके आत्मविश्वास, अनुशासन और सामूहिक चेतना को मजबूत करते हैं।
कुलपति प्रो. (डॉ.) रश्मि ने कहा, “यह शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों में इतिहास, संस्कृति एवं साहित्य के प्रति गहरी समझ विकसित करने में पूरी तरह सफल रहा।” कुलसचिव प्रो. (डॉ.) निर्मल कुमार मंडल ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शैक्षणिक गतिविधियों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनमीत कौर ने बताया कि भ्रमण का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत, साहित्यिक परंपरा एवं ऐतिहासिक चेतना से प्रत्यक्ष जुड़ाव कराना था। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यात्रा को यादगार बना दिया। विभाग भविष्य में भी ऐसे शैक्षणिक भ्रमणों का नियमित आयोजन करता रहेगा।
यह कार्यक्रम राधा गोविन्द विश्वविद्यालय की अनुभव-आधारित शिक्षा की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो झारखंड के युवाओं को सांस्कृतिक एवं बौद्धिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।