रांची, 18 जनवरी 2026: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों में झारखंड के पीड़ितों के लिए महत्वपूर्ण राहत की खबर है। झारखंड हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत मानक संचालन प्रक्रिया का अवलोकन किया और इसे तुरंत प्रकाशित करने का निर्देश दिया। गृह मंत्रालय ने 2 जनवरी 2026 को अनुमोदित इस SOP से ठगी की राशि वापसी की प्रक्रिया काफी सरल और तेज हो गई है।
SOP के प्रमुख प्रावधानों में FIR दर्ज होते ही फ्रॉड से जुड़े बैंक खातों को 24 घंटे के अंदर फ्रीज करना अनिवार्य है, ताकि पैसे ट्रांसफर न हो सकें। पहले पीड़ितों को कोर्ट ऑर्डर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब पुलिस जांच और वेरिफिकेशन के आधार पर रिफंड संभव हो गया है। खास तौर पर ₹50,000 से कम की ठगी में बिना अदालती आदेश के बैंक सीधे राशि वापस कर सकेंगे। बैंकों पर संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत कार्रवाई न करने पर सख्त जुर्माना का प्रावधान भी है।
झारखंड में 2025 में 25,000 से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें ₹1,200 करोड़ से ज्यादा की ठगी हुई- ज्यादातर UPI, निवेश स्कैम और डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी। कोर्ट के निर्देश से रिकवरी रेट 10% से बढ़कर 30-40% तक पहुंचने की उम्मीद है। एक मामले में रांची के व्यापारी को 48 घंटे में ₹3 लाख वापस मिले।
पीड़ित तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं, FIR कराएं और बैंक को सूचित करें। समय पर कार्रवाई से राशि वापसी की संभावना बढ़ जाती है। यह बदलाव साइबर ठगी के खिलाफ मजबूत कदम साबित होगा।