रांची, 14 जनवरी: झारखंड हाईकोर्ट ने तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को “फंसाने” के गंभीर आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की भूमिका की सीबीआई जांच का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति राजेश कुमार की खंडपीठ ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के प्राचार्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने पाया कि ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन ने 30 अप्रैल 2025 को 2025-26 सत्र के लिए संस्थान को प्रवेश की मंजूरी दी थी। इस आधार पर छात्रों ने नामांकन कराया और फीस जमा की, लेकिन बाद में झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने उन्हें परीक्षा में बैठने से रोक दिया।
कोर्ट ने इसे महज प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि छात्रों को जानबूझकर फंसाने जैसा बताया। जज ने तीखी टिप्पणी की कि यह स्थिति ट्रैफिक पुलिस द्वारा “नो एंट्री” बोर्ड हटाकर लोगों को चालान काटने जैसी है। कोर्ट ने भ्रष्टाचार के संकेत जताते हुए कहा कि यह छात्रों के करियर से खिलवाड़ है।
कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया, छात्रों को परीक्षा से वंचित करने के कारणों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करे। सीबीआई को दो सप्ताह में रिपोर्ट सील्ड कवर में जमा करनी होगी। दोनों संस्थाओं को जांच में पूरा सहयोग करने का आदेश दिया गया है।
मामले की अगली सुनवाई 3 फरवरी 2026 को होगी। यह फैसला झारखंड में तकनीकी शिक्षा की अनियमितताओं पर बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे हजारों छात्रों और अभिभावकों में राहत की उम्मीद जगी है।