रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 30 दिसंबर 2025: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुवर दास ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर पेसा अधिनियम की नियमावली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार पेसा के नाम पर आदिवासियों को सिर्फ ‘लॉलीपॉप’ दिखा रही है, जबकि नियमावली में ग्राम सभा की परिभाषा को सीमित कर आदिवासी परंपराओं और स्वशासन को कमजोर किया जा रहा है।
रांची में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में रघुवर दास ने कहा, “कैबिनेट ने नियमावली को मंजूरी तो दे दी, लेकिन इसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? रिपोर्ट्स के मुताबिक, ग्राम सभा की परिभाषा को संकुचित किया गया है, जिससे पारंपरिक नेतृत्व जैसे मांझी, परगना, पाहन आदि की भूमिका कमजोर हो जाएगी। क्या ग्राम सभा की अध्यक्षता गैर-आदिवासी या गैर-पारंपरिक व्यक्ति को दी जाएगी? लघु खनिज, बालू घाट, वन उत्पाद और जल स्रोतों पर ग्राम सभा का स्पष्ट अधिकार क्यों नहीं दिया गया?”
दास ने आरोप लगाया कि यह नियमावली पेसा एक्ट 1996 की मूल भावना के खिलाफ है और आदिवासी समाज को धोखा देने वाली है। उन्होंने मांग की कि नियमावली को तुरंत सार्वजनिक किया जाए और आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुरूप संशोधन किए जाएं, वरना यह कोर्ट में चुनौती का सामना करेगी।
हाल ही में 23 दिसंबर को हेमंत सोरेन कैबिनेट ने ‘पंचायत उपबंध झारखंड नियमावली, 2025’ को मंजूरी दी थी। इससे राज्य के 15 अनुसूचित जिलों में ग्राम सभाओं को खनिज, भूमि अधिग्रहण, वन उत्पाद आदि पर अधिक अधिकार मिलने की उम्मीद थी। सरकार का दावा है कि यह नियमावली आदिवासी स्वशासन को मजबूत करेगी और पूरे देश के लिए मॉडल बनेगी। हालांकि, भाजपा इसे कमजोर और अपारदर्शी बता रही है।
आदिवासी संगठनों में भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं। कुछ ने मंजूरी का स्वागत किया है, तो कुछ पारदर्शिता और परंपराओं के संरक्षण की मांग कर रहे हैं। यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है।