राष्ट्रपति मुर्मू ने संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में भारतीय संविधान का विमोचन किया

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रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)

नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2025: राष्ट्रपति भवन में कल एक ऐतिहासिक समारोह आयोजित हुआ, जिसमें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में भारतीय संविधान का औपचारिक विमोचन किया। यह पहल भारत की भाषाई विविधता को बढ़ावा देने और आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “ओल चिकी लिपि में लिखित संथाली भाषा में भारत के संविधान का लोकार्पण करते हुए मुझे हार्दिक प्रसन्नता हो रही है। यह संथाली भाषी लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है कि अब वे अपनी मातृभाषा में संविधान को पढ़ और समझ सकेंगे।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 2025 ओल चिकी लिपि की शताब्दी वर्ष है, और इस विशेष वर्ष में यह प्रकाशन एक बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रपति ने विधि एवं न्याय मंत्रालय और उनकी टीम की सराहना की।

समारोह में उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उपराष्ट्रपति ने इसे संथाली भाषी समाज के लिए ऐतिहासिक महत्व का बताया और राष्ट्रपति मुर्मू के मार्गदर्शन की प्रशंसा की।

संथाली भाषा, जो भारत की सबसे प्राचीन जीवित भाषाओं में से एक है, को 2003 के 92वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था। यह मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार के आदिवासी समुदायों द्वारा बोली जाती है। ओल चिकी लिपि का आविष्कार पंडित रघुनाथ मुर्मू ने 1925 में किया था।

यह कदम संविधान को हर नागरिक तक पहुंचाने और आदिवासी अस्मिता को सम्मान देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

यह घटना आदिवासी समुदायों के लिए एक गर्व का क्षण है और भारत की समावेशी लोकतंत्र की भावना को मजबूत करती है।