रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 24 दिसंबर 2025: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड राज्य कैबिनेट की बैठक में कुल 39 प्रस्तावों पर मुहर लगी। इनमें सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला पंचायती राज अधिनियम, 1996 की झारखंड नियमावली-2025 को स्वीकृति प्रदान करना रहा।
लंबे समय से लंबित इस नियमावली के लागू होने से राज्य के आदिवासी बहुल अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को व्यापक अधिकार प्राप्त होंगे। अब जल, जंगल, जमीन, छोटे खनिजों के प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, खनन लीज और विकास परियोजनाओं में ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी। इससे स्थानीय परंपराओं का संरक्षण होगा और पंचायती राज व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा, “हमारी सरकार जनता की जरूरतों और भावनाओं के अनुरूप लगातार फैसले ले रही है। पेसा कानून को प्रभावी बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों से विस्तृत सुझाव लिए गए हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में स्वशासन को सशक्त करना है, ताकि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सके।”
यह फैसला आदिवासी समुदायों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि केंद्र द्वारा 1996 में पारित पेसा एक्ट को झारखंड में अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका था। नियमावली की अधिसूचना जारी होने के बाद यह तत्काल प्रभावी हो जाएगी।
कैबिनेट ने अन्य प्रस्तावों में मिशन वात्सल्य योजना की मार्गदर्शिका, आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े प्रावधान और विभिन्न विभागीय सुधारों को भी मंजूरी दी।
आदिवासी संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे स्वशासन की दिशा में बड़ा कदम बताया है।