रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 21 दिसंबर 2025: झारखंड हाईकोर्ट ने राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज की अधिगृहित जमीन पर हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और संभावित जालसाजी के मामले में एंटी-करप्शन ब्यूरो से आपराधिक जांच का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस घोटाले में शामिल अधिकारियों, बिल्डरों और संस्थाओं को चिह्नित करने के साथ-साथ जालसाजी का शिकार हुए आम लोगों के नुकसान की भरपाई करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि 1960 के दशक में रिम्स के लिए अधिगृहित जमीन पर फर्जी दस्तावेजों से खरीद-बिक्री, नक्शा पास कराने और बैंकों द्वारा फ्लैट्स पर लोन देने में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इन गड़बड़ियों की गहन जांच की जाएगी। दोषी पाए गए हर स्तर के अधिकारियों (राजस्व, नगर निगम आदि) से वसूली कर प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया जाएगा।
यह फैसला 2018 से लंबित एक जनहित याचिका की सुनवाई में आया है। पहले कोर्ट के आदेश पर रिम्स परिसर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई, जिसमें कई अवैध अपार्टमेंट और मकान ध्वस्त किए गए। अब भ्रष्टाचार के कोण से जांच होगी। CBI जांच की मांग पर फिलहाल विचार टाल दिया गया है।
यह मामला सरकारी सिस्टम में गहरी खामियों को उजागर करता है, जहां दशकों पुरानी सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण और बिक्री हो सकी। प्रभावित फ्लैट खरीदारों के लिए मुआवजे का प्रावधान राहत देने वाला है। मामले की अगली सुनवाई 6 जनवरी 2026 को होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हैं। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को हर्जाना देने की मांग की है।