रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
जमशेदपुर, 19 दिसंबर: महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में विदेश से प्राप्त एमबीबीएस डिग्री धारक डॉक्टरों द्वारा एफएमजीई परीक्षा में अनुत्तीर्ण होने के बावजूद नकली प्रमाणपत्रों का उपयोग कर नियुक्ति प्राप्त करने के आरोप लगे हैं। एक गुमनाम ई-मेल प्राप्त होने के बाद झारखंड स्वास्थ्य विभाग ने पूरे राज्य में इस संबंध में गहन जांच के निर्देश जारी किए हैं।
शिकायत में उल्लेख है कि विदेशी मेडिकल संस्थानों से डिग्री लेने वाले कई उम्मीदवार स्क्रीनिंग टेस्ट पास न कर पाने पर जाली दस्तावेज बनवाकर सरकारी एवं निजी क्षेत्र में प्रैक्टिस कर रहे हैं। अनुमान के अनुसार लगभग 20 चिकित्सक सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यरत हैं, जबकि 50 से ज्यादा निजी क्लिनिक चला रहे हैं। इससे रोगियों के स्वास्थ्य पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है।
मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य निदेशालय के प्रमुख डॉक्टर सिद्धार्थ सान्याल ने एमजीएम संस्थान के प्रधानाचार्य, अधीक्षक, स्थानीय सिविल सर्जन तथा राज्य के सभी मेडिकल संस्थानों को डॉक्टरों की शैक्षणिक पात्रता, रजिस्ट्रेशन एवं एफएमजीई सर्टिफिकेट की विस्तृत सत्यापन की हिदायत दी है।
विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई चिकित्सक जाली दस्तावेजों पर कार्यरत पाया गया तो उसकी नौकरी रद्द कर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा। साथ ही निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई की अदालती निगरानी एवं राष्ट्रीय स्तर पर नियामक ऑडिट की मांग उठाई गई है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जमशेदपुर अध्यक्ष डॉ. जीसी माझी ने कहा कि ऐसे अयोग्य चिकित्सकों से उपचार कराने पर गलत निदान एवं दवाओं से मरीजों की हालत बिगड़ सकती है, कई मामलों में मौतें भी हुई हैं। उन्होंने पहले ही प्रशासन को ऐसे संदिग्धों की सूची सौंपी थी, पर अब तक निर्णायक कदम नहीं उठाए गए।