रांची, 11 दिसंबर 2025: धर्मांतरित आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति सूची से हटाने की मांग को लेकर केंद्रीय सरना समिति ने 12 दिसंबर को राजभवन के सामने महाधरना का ऐलान किया है। समिति का आरोप है कि ईसाई बने आदिवासी दोहरा लाभ ले रहे हैं- एक ओर एसटी कोटे में आरक्षण, दूसरी ओर अल्पसंख्यक लाभ।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने कहा, “जो सरना परंपरा छोड़ चुके हैं, वे आदिवासी पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं। एससी की तरह एसटी में भी धर्म परिवर्तन पर आरक्षण खत्म होना चाहिए।” समिति ने हजारों सरना अनुयायियों से धरने में शामिल होने की अपील की है।
यह मांग झारखंड में लंबे समय से गूंज रही है। 2023 में 24 दिसंबर की महारैली और 2024 में जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदर्शन के बाद यह तीसरा बड़ा आंदोलन होगा। समिति 2025 जनगणना में सरना को अलग धर्म कोड देने की मांग भी कर रही है।
विपक्षी दलों ने इसे “आदिवासी समाज को बांटने की साजिश” बताया है। झामुमो नेता सुप्रियो भट्टाचार्य बोले, “एसटी का आधार जाति है, धर्म नहीं। डीलिस्टिंग संविधान के अनुच्छेद-25 का उल्लंघन होगा।” ईसाई आदिवासी संगठनों ने भी कड़ा विरोध जताया है।
रांची प्रशासन ने धरना स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात करने की तैयारी शुरू कर दी है। 12 दिसंबर का यह प्रदर्शन झारखंड की आदिवासी राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।