रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
पटना, 9 दिसंबर 2025: बिहार में एक RTI ने सत्ता के गलियारों में भूचाल ला दिया है। सूचना के अधिकार से मिले जवाब में खुलासा हुआ है कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी सरकार के 8 बड़े नेता एक साथ वर्तमान पद का पूरा वेतन और पूर्व पदों की पेंशन दोनों ले रहे हैं। इनमें एक केंद्रीय राज्य मंत्री और बिहार के वित्त मंत्री तक शामिल हैं।
RTI कार्यकर्ता शिव प्रकाश रंजन ने बिहार विधानसभा सचिवालय व वित्त विभाग से जानकारी मांगी थी। 2 दिसंबर को आए जवाब में आठ नेताओं के नाम सामने आए:
1. सतीश चंद्र दुबे (केंद्रीय राज्य मंत्री, कोयला एवं खनन)
2. बिजेंद्र प्रसाद यादव (बिहार के वित्त मंत्री)
3. उपेंद्र कुशवाहा (राज्यसभा सांसद)
4. देवेश चंद्र ठाकुर (जदयू नेता, पूर्व राज्यसभा सांसद)
5. नीतीश मिश्रा (पूर्व मंत्री)
6. ललन कुमार सर्राफ (जदयू नेता)
7. संजय सिंह (जदयू नेता)
8. एक अन्य NDA नेता
ये सभी नेता बिहार सरकार से पूर्व विधायक या मंत्री के रूप में ₹30,000 से ₹45,000 तक मासिक पेंशन ले रहे हैं, जबकि वर्तमान में सांसद या मंत्री के तौर पर लाखों का वेतन-भत्ता भी प्राप्त कर रहे हैं।
बिहार विधान मंडल सदस्य (वेतन, भत्ते एवं पेंशन) अधिनियम-2011 की धारा 6A स्पष्ट कहती है कि जब कोई व्यक्ति दूसरा लाभ का पद (केंद्रीय मंत्री/सांसद) ग्रहण करता है तो उसे पूर्व पेंशन छोड़नी होती है। संसद के नियमों में भी “एक व्यक्ति-एक पेंशन” का प्रावधान है। कानून विशेषज्ञ इसे सीधा उल्लंघन बता रहे हैं।
विपक्ष ने हमला बोला है। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “जो सरकार कर्मचारियों की पुरानी पेंशन छीन लेती है, उसके मंत्री खुद डबल पेंशन ले रहे हैं। यह दोहरा चरित्र है।” कांग्रेस ने भी सभी आठ नेताओं से पेंशन वापस करने और कार्रवाई की मांग की है।
जदयू और भाजपा ने अभी तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया। सूत्रों के अनुसार मामला बिहार लोकायुक्त और पटना हाईकोर्ट पहुंचने की कगार पर है। कई सामाजिक संगठन अवैध रूप से ली गई पेंशन की वसूली के लिए PIL दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।