झारखंड में PESA नियमावली लागू करने की अंतिम दौड़, कैबिनेट स्वीकृति बस बाकी

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रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)

रांची, 7 दिसंबर 2025: झारखंड में 29 साल से लंबित पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम-1996 (PESA) की राज्य नियमावली अब लागू होने के अंतिम चरण में है। पंचायती राज विभाग ने सभी विभागों के सुझाव शामिल कर संशोधित ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भेज दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, आगामी कैबिनेट बैठक में इसकी स्वीकृति मिलने की पूरी संभावना है।

नई नियमावली में ग्राम सभाओं को अभूतपूर्व अधिकार दिए गए हैं। लघु खनिज, रेत, पत्थर, जल स्रोत, मछली पालन और वन उपज पर ग्राम सभा की पूर्व सहमति अनिवार्य होगी। पारंपरिक मानकी-मुंडा प्रथा को मान्यता देते हुए ग्राम सभा की बैठकें पारंपरिक प्रधान की अध्यक्षता में होंगी। आदिवासी भूमि की बहाली, शराब नियंत्रण और गांव के सामाजिक-आर्थिक विकास योजनाओं पर ग्राम सभा का अंतिम अधिकार होगा।

झारखंड हाईकोर्ट के कड़े रुख ने प्रक्रिया को गति दी है। कोर्ट ने 31 अक्टूबर को अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कैबिनेट निर्णय की जानकारी मांगी थी। इसके बाद सरकार ने तेजी दिखाई। पूर्व में 2023 में जारी ड्राफ्ट पर 1200 से अधिक सुझाव आए थे, जिनमें से प्रासंगिक सुझावों को शामिल किया गया है।

राज्य के 13 जिलों के 104 प्रखंडों में लागू होने वाली यह नियमावली आदिवासी समुदाय के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। कैबिनेट की मुहर लगते ही झारखंड पांचवीं अनुसूची के तहत पूर्ण PESA राज्य बन जाएगा।