रिपोर्ट: संतोष कुमार (@santoshrmg)
रांची, 6 दिसंबर। झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग के बहुचर्चित खासमहल एवं वन भूमि घोटाले में निलंबित आईएएस विनय कुमार चौबे और रांची के बड़े ऑटोमोबाइल कारोबारी विनय सिंह की जमानत याचिकाएँ खारिज करते हुए इसे “योजनाबद्ध धोखाधड़ी का स्पष्ट उदाहरण” करार दिया है।
न्यायमूर्ति की एकल पीठ ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा पेश मनी ट्रेल, अवैध लेन-देन के दस्तावेज और फर्जी म्यूटेशन के प्रमाणों को प्रथम दृष्टया मजबूत माना। कोर्ट ने कहा कि आरोपी सरकारी 2.75 एकड़ खासमहल एवं गैर-मजरुआ वन भूमि को निजी संपत्ति दिखाकर करोड़ों का लाभ उठाने में लिप्त थे।
एसीबी की चार्जशीट के अनुसार, 2016-18 में हजारीबाग के तत्कालीन डीसी विनय चौबे ने पद का दुरुपयोग कर 1948 से संरक्षित इस भूमि का अवैध म्यूटेशन कराया और अपने करीबी विनय सिंह के नाम रजिस्ट्री करा दी। विनय सिंह ने उसी भूमि पर नेक्सजेन शोरूम खोल लिया, जिसे बाद में एसीबी ने सील कर दिया।
मामले में 73 आरोपी हैं, जिनमें हजारीबाग विधायक के रिश्तेदार, तत्कालीन खासमहल पदाधिकारी विनोद चंद्र झा, सीओ शैलेश कुमार और दलाल विजय सिंह शामिल हैं। एसीबी ने 5 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का मनी ट्रेल भी खोज निकाला है।
विनय चौबे इस समय जेल में हैं और शराब घोटाले में भी ईडी की जांच झेल रहे हैं। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को राहत देने से इनकार करते हुए कहा कि सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका बनी हुई है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में होगी।